Banking News: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के कामकाज को लेकर नए नियमों का ऐलान किया है। इन नियमों का उद्देश्य बैंक बोर्ड की कार्यप्रणाली (Bank Board Governance) को अधिक सरल, प्रभावी और लचीला बनाना है। आरबीआई का कहना है कि नए मानदंड 1 अक्टूबर से पूरे देश में लागू हो जाएंगे। इन बदलावों से बैंक अपने कामकाज को बेहतर तरीके से संचालित कर सकेंगे, जबकि बोर्ड की जवाबदेही और निगरानी भी पहले की तरह बनी रहेगी।
बैंकों के लिए नई गाइडलाइन, 1 अक्टूबर से बदलेगी बोर्ड बैठकों की कार्यप्रणाली (तस्वीर-Canva/istock)
क्यों किए गए नए बदलाव?
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक आरबीआई ने बताया कि समय के साथ बैंकिंग क्षेत्र की जरुरतें बदल रही हैं। ऐसे में पुराने नियमों में बदलाव करना जरूरी हो गया था। नए नियमों को इस तरह तैयार किया गया है कि बैंकों को अपने कामकाज में अधिक स्वतंत्रता मिले और वे अपनी जरुरतों के अनुसार फैसले ले सकें। इससे अनावश्यक प्रक्रियाएं कम होंगी और निर्णय लेने की गति भी तेज होगी।
बैंक बोर्ड को मिलेगी ज्यादा स्वतंत्रता
नए नियमों के तहत अब बैंकों के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को अपने संस्थान की जरुरतों और प्राथमिकताओं के अनुसार बैठक का एजेंडा तय करने की अधिक स्वतंत्रता मिलेगी। पहले कई मामलों में एजेंडा तय करने के लिए विस्तृत प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता था, लेकिन अब बोर्ड अपने विवेक से महत्वपूर्ण विषयों को प्राथमिकता दे सकेगा। इससे हर बैंक अपनी कारोबारी जरुरतों के अनुसार निर्णय लेने में अधिक सक्षम होगा।
अहम मामलों पर बनी रहेगी सख्त निगरानी
हालांकि आरबीआई ने बोर्ड को अधिक स्वतंत्रता दी है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण मामलों में निगरानी पहले की तरह अनिवार्य रहेगी। इनमें बैंक के जोखिम प्रबंधन (Risk Management), नियमों का पालन, वित्तीय प्रदर्शन, आंतरिक नियंत्रण और ग्राहकों के हितों की सुरक्षा जैसे विषय शामिल हैं। यानी बैंक अपनी सुविधा के अनुसार काम कर सकेंगे, लेकिन इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बोर्ड की जिम्मेदारी कम नहीं होगी।
फैसलों को लागू करने का तरीका बोर्ड तय करेगा
आरबीआई ने संशोधित नियमों में यह भी स्पष्ट किया है कि बोर्ड बैठकों में लिए गए फैसलों को लागू करने की प्रक्रिया अब संबंधित बैंक का बोर्ड खुद तय करेगा। यानी निर्णयों को लागू करने के लिए सभी बैंकों पर एक जैसी प्रक्रिया लागू नहीं होगी। इससे बैंकों को अपनी कार्यशैली के अनुसार बेहतर व्यवस्था बनाने की सुविधा मिलेगी।
एक्शन टेकन रिपोर्ट पर नहीं माना सुझाव
नए नियम तैयार करते समय आरबीआई ने विभिन्न पक्षों से सुझाव भी मांगे थे। इनमें बोर्ड बैठकों के बाद हर फैसले पर अनिवार्य एक्शन टेकन रिपोर्ट जारी रखने का सुझाव भी शामिल था। हालांकि केंद्रीय बैंक ने इस सुझाव को स्वीकार नहीं किया। इसका मतलब है कि अब इस संबंध में पहले जैसी अनिवार्य व्यवस्था लागू नहीं होगी और बैंक अपनी आंतरिक प्रक्रिया के अनुसार काम कर सकेंगे।
एजेंडा तय करने की जिम्मेदारी चेयरमैन की होगी
आरबीआई ने यह भी साफ किया है कि बोर्ड बैठक का एजेंडा तय करने से पहले सभी डारेक्टर्स की राय लेना अच्छा माना जाएगा। हालांकि अंतिम जिम्मेदारी बोर्ड के चेयरमैन की होगी। यानी चेयरमैन यह सुनिश्चित करेंगे कि बैठक में किन विषयों पर चर्चा की जाए और कौन से मुद्दे प्राथमिकता में रहें।
‘महत्वपूर्ण मामलों’ की अलग परिभाषा की जरूरत खत्म
संशोधित नियमों में एक और बड़ा बदलाव यह किया गया है कि अब 'महत्वपूर्ण मामलों' की अलग से परिभाषा तय करने की जरुरत नहीं होगी। पहले इस विषय पर अलग-अलग राय और प्रक्रियाएं अपनाई जाती थीं। अब बैंक अपने कामकाज और जरुरतों के अनुसार ऐसे मामलों की पहचान कर सकेंगे, जिससे निर्णय प्रक्रिया और अधिक सरल होगी।
बैंकों को क्या होगा फायदा?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन नए नियमों से बैंक बोर्ड की कार्यक्षमता बढ़ेगी और निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी। अनावश्यक औपचारिकताएं कम होने से बैंक अपने कारोबार और ग्राहकों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले समय पर ले सकेंगे। साथ ही, जोखिम प्रबंधन और ग्राहकों की सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में आरबीआई की निगरानी पहले की तरह बनी रहेगी। कुल मिलाकर, 1 अक्टूबर से लागू होने वाले ये नए नियम भारतीय बैंकिंग व्यवस्था को अधिक आधुनिक, लचीला और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
