RBI MPC October Meeting: आरबीआई (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक का फैसला आ गया। आरबीआई ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। 5.5 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मीटिंग के बाद ये घोषणा की कि रेपो रेट में बिना किसी बदलाव के 5.5% पर बरकरार रखा गया है। इससे साफ है आपकी EMI में कोई बदलाव नहीं होगा। इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति ने अपनी अगस्त की बैठक में रेपो रेट को 5.50% पर अपरिवर्तित रखा था। इससे पहले, MPC ने ब्याज दरों में कटौती के साथ-साथ नकद आरक्षित अनुपात (CRR) में 100 बेसिस पॉइंट्स की कमी करके मौद्रिक नीति को और अधिक सहज बनाया था।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा
रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर कॉमर्शियल बैंक अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिये केंद्रीय बैंक से कर्ज लेते हैं। रेपो दर के यथावत रहने से होम, वाहन समेत अन्य खुदरा लोन पर ब्याज में बदलाव होने की संभावना नहीं है। दूसरी ओर आरबीआई ने 2025-26 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया है जबकि पहले इसके 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक स्तर पर चुनौतियों के बावजूद बेहतर मानसून और अन्य कारणों से पहली तिमाही में वृद्धि दर बेहतर रही हैमौद्रिक नीति समिति ने मौद्रिक नीति रुख को तटस्थ रखने का निर्णय किया है। जीएसटी को युक्तिसंगत बनाने से मुद्रास्फीति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, साथ ही उपभोग एवं वृद्धि विकास को बढ़ावा मिलेगा। वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान, जो पहले 6.5 प्रतिशत था। अनुकूल मानसून, कम मुद्रास्फीति और मौद्रिक नरमी से आर्थिक वृद्धि की संभावना मजबूत बनी हुई है।
RBI गवर्नर का कहना है कि मुद्रास्फीति का परिदृश्य अधिक अनुकूल हो गया है, लेकिन बाहरी अनिश्चितता आर्थिक परिदृश्य पर छाई हुई है। औसत मुख्य मुद्रास्फीति को घटाकर 2.6% कर दिया गया है। वित्त वर्ष 2026 के लिए औसत मुख्य मुद्रास्फीति को पहले के 3.1% से घटाकर 2.6% कर दिया गया है।
आरबीआई गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि जीएसटी दरों में कटौती और अन्य उपायों को देखते हुए मुद्रास्फीति चालू वित्त वर्ष में 2.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो पहले 3.1 प्रतिशत था। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में घरेलू आर्थिक गतिविधियों में तेजी जारी है। शुल्क संबंधी घटनाक्रम से चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में वृद्धि दर में कमी आने का अनुमान है।
इस वर्ष रेपो रेट में कुल 1 प्रतिशत की कटौती से नए लोन की उधारी लागत में 0.58 प्रतिश्त की कमी आई है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 700.2 अरब अमेरिकी डॉलर, जो 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त है।
गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई, निर्यातकों की मदद के लिए विदेशी मुद्रा खातों से धन वापस लाने की समय-सीमा बढ़ाएगा। एनबीएफसी द्वारा बुनियादी ढांचा क्षेत्र को वित्तपोषण की लागत कम करने के लिए आरबीआई ने जोखिम भार कम करने का निर्णय लिया।
