RBI MPC Meeting:आरबीआई के फैसले के पहले शेयर बाजार में बहार है। बीएसई का सेंसेक्स 350.08 अंक उछलकर 63,142.96 अंक पर बंद हुआ, वही एनएसई का निफ्टी भी 127.40 अंक चढ़कर 18,726.40 अंक पर बंद हुआ है। इस बढ़त के साथ सेंसेंक्स ने साल 2023 में पहली बार 63 हजार का आंकड़ा पार किया है। शेयर बाजार में रौनक की एक बड़ी वजह 8 जून को आने वाला आरबीआई का फैसला है। असल में जिस तरह पिछले कुछ समय से आरबीआई के लिए इकोनॉमी के अहम इंडीकेटर उत्साह बढ़ाने वाले रहे हैं, ऐसे में बाजार सहित एक्सपर्ट को यह उम्मीद बढ़ गई है कि आरबीआई मौद्रिक समीक्षा नीति में कोई झटका नहीं देगा।
आरबीआई का फैसले पर सबकी नजर
रेपो रेट में पर सबकी नजर
महंगाई, औद्योगिक उत्पादन, ग्रोथ रेट जैसे अहम इंडीकेटर को देखते हुए इस बार उम्मीद है कि आरबीआई रेपो रेट को 6.5 फीसदी पर बरकरार रख सकता है। आरबीआई ने अप्रैल 2023 से पहले बीते एक साल में महंगाई पर लगा लगाने के लिए रेपो रेट में करीब 2.5 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। जिसके बाद से होम लोन , कार लोन सहित दूसरे कर्ज महंगे हो गए थे। आरबीआई की कोशिश थी कर्ज महंगा कर महंगाई पर लगाम लगाई जाय। और अब यह टारगेट आरबीआई के दायरे में हैं।
महंगाई 18 महीने के निचले स्तर पर
- रिटेल महंगाई दर 18 महीनों के निचले स्तर 4.7 फीसदी पर आ चुकी है। और वह आरबीआई के सामान्य स्तर 6 फीसदी से नीचे हैं, उसे देखते हुए आरबीआई रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं कर सकता है। ऐसे में आरबीआई के लिए इस बार की समीक्षा बैठक में सबसे बड़ी राहत की बात यही रहने वाली है। और ऐसी संभावना है कि मई के जब आंकड़े आएंगे तो महंगाई दर में और गिरावट आएगी।
- इसी तरह चौथी तिमाही में GDP ग्रोथ रेट उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 6.1 फीसदी पर रही है। साथ ही पूरे वित्त वर्ष 2022-23 के लिए यह 7.2 फीसदी पर रही। जो आरबीआई के लिए राहत की बात है।
- बैंकिंग सेक्टर का भी परफॉर्मेंस आरबीआई के लिए पॉजिटिव संकेत हैं। पिछले एक साल से ब्याज दरों में बढ़ोतरी के बावजूद बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ (नॉन फूड) 15-16 फीसदी बनी हुई है।
- इसके अलावा अप्रैल ऐसा महीना रहा है जब भारत का निर्यात 12.7 फीसदी की दर से बढ़ा है। जो कि जून 2022 के बाद सबसे अच्छा प्रदर्शन है।
