RBI MPC में बड़ा फैसला, फ्रॉड होने पर वापस मिलेंगे ₹25,000!

रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग में RBI ने ग्राहकों को बड़ी राहत दी है। फरवरी 2026 की बैठक में गवर्नर ने नए फ्रेमवर्क का ऐलान किया, जिसके तहत ऑनलाइन फ्रॉड होने पर ग्राहकों को ₹25,000 तक का मुआवजा मिल सकेगा। यह नियम UPI और कार्ड पेमेंट्स पर लागू होगा, जिससे साइबर ठगी के खिलाफ सुरक्षा मजबूत होगी।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की फरवरी 2026 की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक आम आदमी के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है। इस बैठक में न केवल देश की अर्थव्यवस्था की सेहत पर चर्चा हुई, बल्कि डिजिटल युग में बढ़ती साइबर ठगी को रोकने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया गया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने घोषणा की है कि RBI डिजिटल पेमेंट्स में उपभोक्ता सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक नया फ्रेमवर्क ला रहा है। इस नए सिस्टम के तहत, अगर कोई ग्राहक किसी फ्रॉड ट्रांजैक्शन यानी डिजिटल ठगी का शिकार होता है, तो उसे ₹25,000 तक का मुआवजा मिल सकेगा। यह फैसला उन लाखों लोगों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है जो अक्सर साइबर ठगों के जाल में फंसकर अपनी मेहनत की कमाई गंवा देते हैं।

RBI fraud Compensation.

पहले नहीं मिलता था मुआवजा

अभी तक 2017 के पुराने नियमों के अनुसार, अनाधिकृत लेन-देन (Unauthorized Transactions) में ग्राहकों की जिम्मेदारी तो सीमित थी, लेकिन मुआवजे की कोई स्पष्ट सीमा या मजबूत प्रक्रिया नहीं थी। अब नया नियम विशेष रूप से UPI, डेबिट-क्रेडिट कार्ड पेमेंट्स और ऑनलाइन फंड ट्रांसफर पर लागू होगा। यदि ग्राहक के साथ धोखाधड़ी होती है और वह इसकी सूचना समय पर बैंक को देता है, तो बैंक या पेमेंट प्रोवाइडर को उस नुकसान की भरपाई मुआवजे के रूप में करनी होगी। इस कदम का उद्देश्य डिजिटल बैंकिंग पर लोगों का भरोसा बढ़ाना और बैंकों को अपनी सुरक्षा प्रणाली और कड़ी करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

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