डॉलर में कमाई, बेहद कम जनसंख्या, दुनिया के सबसे बड़े गैस फील्ड और तेल के भंडार की वजह से कतर दुनिया के सबसे अमीर देशों में शामिल है। लेकिन, US-Iran War के चलते हॉमुज स्ट्रेट बंद होने की बड़ी कीमत चुका रहा है। 1 डॉलर की कीमत करीब 3.50 कतरी रियाल है। युद्ध के बाद भी यह स्थिर है। क्योंकि, कतर पिछले कई दशकों से तरल प्राकृतिक गैस (LNG) बेचकर अरबों डॉलर कमा रहा है। देश की 60 फीसदी से ज्यादा सरकारी आय गैस और उससे जुड़े निर्यात से आती है। लेकिन, Hormuz बंद होने और गैस फील्ड पर ईरानी हमलों के बाद से बड़ी आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है।क्योंकि, हॉर्मुज बंद होने के बाद कतर की LNG सप्लाई ठप पड़ गई है।
कतर का रियाल पश्चिम एशिया में सबसे मजबूत मुद्राओं में शामिल है
दो महीने LNG निर्यात ठप
फरवरी में शुरू हुए इस युद्ध के शुरुआती दौर में ही ईरान ने कतर के रास लफान गैस प्लांट पर हमला कर दिया था। इसके साथ ही ईरान और अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर रखा है, जिसकी वजह से दो महीने से कतर समुद्री रास्ते से एक गैस टैंकर बाहर नहीं भेज पाया है। रास लफान दुनिया का सबसे बड़ा गैस फील्ड है। कतर यहां से पूरी दुनिया को LNG बेचता है। लेकिन, ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद यहां बड़ा नुकसान हुआ है।
उत्पादन 17% गिरा
कतर को ईरानी हमलों के बाद सिर्फ शिपिंग ही नहीं रोकनी पड़ी है। बल्कि, गैस प्रोडक्शन से जुड़े बुनियादी ढांचे को बड़ा नुकसान हुआ है, जिसकी वजह से रास लफान गैस फील्ड की कई अहम इकाइयां ठप हो गई हैं। इसकी वजह से कतर की गैस उत्पादन क्षमता करीब 17 फीसदी तक घट गई है। IEA के एक्सपर्ट्स का मानना है कि भले ही होर्मुज का समुद्री रास्ते जल्द खुल जाए। लेकिन, कतर से होने वाली गैस की सप्लाई युद्ध से पहले जैसी स्थिति में पहुंचने में कई साल लग सकते हैं।
सामने आई बड़ी कमजोरी
युद्ध के दौरान कतर को एक बेहद बड़ी रणनीतिक कमजोरी का सामना करना पड़ा है। असल में उसके पास सऊदी अरब और UAE की तरह पाइपलाइन नेटवर्क नहीं है। लिहाजा, Hormuz बंद होने की वजह से कतर की पूरी अर्थव्यवस्था ठप पड़ गई है।
होटल खाली, बाजार सूने
सोशल मीडिया और कई मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि फीफा वर्ल्ड आयोजित कर चुके चमक-दमक वाले दोहा जैसे शहरों में सन्नाटा पसरा है। यहां के ज्यादातर होटल खाली पड़े और बाजार सूने हैं। जबकि, दोहा को कतर ने अरबों डॉलर खर्च कर ग्लोबल टूरिज्म और फाइनेंस हब बनाया था। लेकिन, युद्ध के साये में शहर में अब सैलानियों का कोलाहल नहीं, बल्कि एयर रेड सायरन, मिसाइल हमलों के धमाके सुनाई दे रहे हैं। हालांकि, पिछले 40 दिन से युद्ध रुका है। लेकिन, फिर भी यहां पर्यटक नहीं आ रहे हैं।
IMF ने दी बड़ी चेतावनी
कतर की इकोनॉमी को लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी बड़ी चेतावनी दी है। IMF के मुताबिक युद्ध का असर अब कतर की पूरी इकोनॉमी पर होगा। इसकी वजह से इस साल कतर की अर्थव्यवस्था 8.6 फीसदी तक सिकुड़ सकती है। कतर की वर्किंग हॉर्स Qatar Energy को पहले ही अरबों डॉलर का नुकसान हो चुका है। इसके साथ ही हर गुजरते दिन के साथ देश को LNG एक्सपोर्ट और शिपिंग ठप होने हजारों करोड़ का नुकसान हो रहा है।
अब खाने तक पर संकट गहराया
कतर भले ही दुनिया के सबसे अमीर देशों में शामिल है। लेकिन, युद्ध ने इसकी एक बड़ी कमजोरी उजागर की है। असल में कतर अपने खाने-पीने की 90 फीसदी जरूरतें आयात के जरिये पूरा करता है। समुद्री रास्ते बाधित होने के बाद अब सामान एयर कार्गो और ट्रकों से लाया जा रहा है, जिससे लागत तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, सरकार भारी सब्सिडी देकर कीमतों को कंट्रोल करने की कोशिश कर रही है, लेकिन लंबे अगर संकट जारी रहा, खाद्य संकट गहरा हो सकता है।
