SCO Summit Putin SCO Bank Plan : रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO के सदस्य देशों के बीच एक नया डेवलपमेंट बैंक (SCO Bank) बनाने का प्रस्ताव दिया है। पुतिन का कहना है कि यह बैंक उन वित्तीय प्रणालियों से ज्यादा से ज्यादा स्वतंत्र होना चाहिए, जिनका इस्तेमाल कुछ देश आर्थिक और जियो पॉलिटकल दबाव बनाने के लिए करते हैं। आसान भाषा में कहें तो रूस ऐसा वित्तीय रास्ता चाहता है, जिसके जरिये SCO देश आपस में कारोबार और बड़े प्रोजेक्ट्स को पश्चिमी वित्तीय नेटवर्क पर कम निर्भर रहते हुए आगे बढ़ा सकें।
पुतिन ने रखा SCO बैंक बनाने का प्रस्ताव
पुतिन ने एक सितंबर 2026 को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में SCO Summit के दौरान यह प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित SCO डेवलपमेंट बैंक को संयुक्त और आपसी फायदे वाली आर्थिक परियोजनाओं के लिए अहम भूमिका निभानी चाहिए। इस प्रस्ताव का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि रूस और ईरान पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं और SCO के भीतर डॉलर तथा पश्चिमी वित्तीय ढांचे पर निर्भरता कम करने की चर्चा लगातार तेज हो रही है।
क्या है SCO डेवलपमेंट बैंक?
डेवलपमेंट बैंक यानी विकास बैंक ऐसी वित्तीय संस्था होती है जो लंबे समय वाली परियोजनाओं के लिए कर्ज और फंडिंग उपलब्ध कराती है। इनमें सड़क, रेलवे, ऊर्जा, बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक परियोजनाएं और सीमा-पार कनेक्टिविटी जैसे काम शामिल हो सकते हैं। अगर पुतिन का प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो SCO के सदस्य देश मिलकर एक ऐसा बैंक बना सकते हैं, जो संगठन के भीतर आर्थिक परियोजनाओं को वित्त उपलब्ध कराए। इससे सदस्य देशों के बीच निवेश और व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है। पुतिन ने SCO बिजनेस काउंसिल और इंटरबैंक एसोसिएशन जैसी मौजूदा व्यवस्थाओं का भी जिक्र किया। यानी प्रस्ताव सिर्फ एक बैंक बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि SCO के भीतर एक ज्यादा मजबूत और संगठित वित्तीय ढांचा खड़ा करने की कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है।
डाॅलर और SWIFT सिस्टम को चुनौती
इस प्रस्ताव की सबसे बड़ी वजह रूस पर लगाए गए पश्चिमी प्रतिबंध हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर कई तरह के आर्थिक और वित्तीय प्रतिबंध लगाए गए। इसके बाद मॉस्को ने डॉलर पर अपनी निर्भरता घटाने और पश्चिमी वित्तीय नेटवर्क के विकल्प तलाशने पर जोर दिया। इसी रणनीति का एक हिस्सा राष्ट्रीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाना भी है। पुतिन ने दावा किया कि रूस और SCO देशों के बीच आपसी भुगतान में 98 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि SCO देशों के साथ रूस का व्यापार पिछले साल 400 अरब डॉलर से ज्यादा रहा। अगर स्थानीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ता है और साथ ही SCO देशों के पास अपना विकास बैंक तथा वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था होती है, तो लेनदेन के लिए डॉलर और पश्चिमी वित्तीय बुनियादी ढांचे (SWIFT) पर निर्भरता कम की जा सकती है। यही वजह है कि SCO बैंक के प्रस्ताव को सिर्फ बैंकिंग से जुड़ी पहल नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे डॉलर और SWIFT को चुनौती के तौर पर भी देखा जा रहा है।
भारत के लिए कितना बड़ा बदलाव?
भारत के लिए यह प्रस्ताव काफी अहम हो सकता है। SCO में भारत एक बड़ा आर्थिक देश है और रूस के साथ उसके ऊर्जा, रक्षा तथा व्यापार संबंध मजबूत हैं। ऐसे में संगठन के भीतर किसी साझा विकास बैंक के बनने से भारत को क्षेत्रीय परियोजनाओं के लिए एक नया वित्तीय विकल्प मिल सकता है। हालांकि, भारत के अमेरिका और यूरोप के साथ भी बड़े व्यापारिक और रणनीतिक संबंध हैं। ऐसे में भारत के लिए ऐसा वित्तीय संस्थान ज्यादा उपयोगी होगा, जो आर्थिक सहयोग और विकास पर केंद्रित हो, न कि सिर्फ डॉलर और SWIFT के खिलाफ बनाया गया मंच बने।
चीन के लिए भी बड़ा मौका
चीन के लिए SCO बैंक का प्रस्ताव रणनीतिक और आर्थिक दोनों लिहाज से अहम है। चीन पहले से ही इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचा, व्यापार और निवेश के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाता है। एक साझा विकास बैंक बनने पर चीन के पास SCO देशों के भीतर परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय ढांचा आ सकता है। इसके साथ ही स्थानीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाने की कोशिशों को भी बल मिल सकता है।
ईरान और रूस को सबसे ज्यादा फायदा?
रूस और ईरान दोनों ही लंबे समय से पश्चिमी प्रतिबंधों के दायरे में हैं। ऐसे में SCO के भीतर वैकल्पिक भुगतान और वित्तीय व्यवस्था उनके लिए खास मायने रखती है। अगर भविष्य में SCO का बैंक सीमा-पार परियोजनाओं को फंड करता है और सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में भुगतान को आसान बनाता है, तो रूस और ईरान को पश्चिमी वित्तीय नेटवर्क के बाहर कारोबार करने के कुछ नए विकल्प मिल सकते हैं। यही कारण है कि रूस इस पहल को सिर्फ आर्थिक परियोजनाओं के लिए फंडिंग के नजरिये से नहीं देख रहा, बल्कि इसे व्यापक वित्तीय स्वतंत्रता के हिस्से के तौर पर भी आगे बढ़ाना चाहता है।
