पड़ोसी देश पाकिस्तान एक बार फिर बड़े ऊर्जा संकट (Energy Crisis) के मुहाने पर खड़ा है। पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालातों ने पाकिस्तान की गैस सप्लाई चेन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण पाकिस्तान में एलपीजी (LPG) और प्राकृतिक गैस की भारी किल्लत हो गई है। घरेलू स्तर पर गैस की सप्लाई लगभग ठप होने की कगार पर है, जिससे न केवल आम जनता के चूल्हे ठंडे पड़ रहे हैं, बल्कि बिजली उत्पादन और उद्योगों पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
महंगी LNG खरीदेगा पाकिस्तान
गैस की इस भारी कमी को पूरा करने के लिए पाकिस्तान सरकार ने अब अंतरराष्ट्रीय बाजार से महँगी लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) खरीदने का फैसला किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पहले से ही नाजुक है और ऐसे में रिकॉर्ड तोड़ ऊंची कीमतों पर एलएनजी खरीदना देश के खजाने पर बड़ा बोझ डालेगा। ईरान से आने वाली गैस सप्लाई में रुकावट आने के बाद, पाकिस्तान के पास अपनी बिजली की मांग और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्पॉट मार्केट से महँगी बोलियां लगाकर ईंधन खरीदने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
आम जनता पर बढ़ेगा बोझ
पाकिस्तान में गैस संकट का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है। जब सरकार महंगी दर पर गैस खरीदेगी, तो इसका बोझ बिजली के बिलों और एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में जनता पर ही डाला जाएगा। पहले से ही रिकॉर्ड तोड़ महंगाई झेल रहे पाकिस्तानी नागरिकों के लिए यह एक दोहरी मार जैसा है। शहरों में गैस की घंटों तक कटौती की जा रही है, जिससे रेस्टोरेंट, ढाबे और छोटे कारखाने बंद होने के कगार पर हैं। अगर सप्लाई जल्द बहाल नहीं हुई, तो आने वाले हफ्तों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
आपूर्ति ठप होने की मुख्य वजह
पाकिस्तान अपनी गैस जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा ईरान और अन्य पड़ोसी रास्तों से पूरा करता रहा है। लेकिन युद्ध की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के डर से यह सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो गई है। इसके अलावा, पाकिस्तान के पास गैस स्टोर करने की क्षमता (Storage Capacity) बहुत कम है, जिसके कारण वह आपातकालीन स्थिति में ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाता। यही वजह है कि जैसे ही सप्लाई रुकी, देश में हाहाकार मच गया। अब महँगी एलएनजी के जरिए इस कमी को भरने की कोशिश तो की जा रही है, लेकिन कंगाली के दौर में यह 'मरहम' कम और 'घाव' ज्यादा नजर आ रहा है।
बिजली संकट का खतरा
पाकिस्तान में बिजली उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा गैस आधारित पावर प्लांट्स से आता है। ईंधन की कमी के कारण कई पावर प्लांट्स अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि देश के कई बड़े शहरों और ग्रामीण इलाकों में घंटों तक बिजली गुल (Load Shedding) रह रही है। सरकार को डर है कि अगर जल्द ही एलएनजी के जहाज पाकिस्तान नहीं पहुंचे, तो देश का एक बड़ा हिस्सा अंधेरे में डूब सकता है।
