Onion Prices : प्याज की बढ़ती कीमतों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने आम लोगों को राहत देने के लिए एक खास कदम उठाया है। सरकार ने अपने इमरजेंसी स्टॉक (बफर स्टॉक) से सस्ता प्याज बेचना शुरू किया है। इस फैसले के बाद महज 10 दिनों के भीतर 17 प्रमुख शहरों में करीब 4,000 टन प्याज बेचा जा चुका है। यह जानकारी उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने दी है। सरकार का मकसद बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाना है ताकि इसकी बढ़ती कीमतों को रोका जा सके।
प्याज की महंगाई पर सर्जिकल स्ट्राइक! (तस्वीर-AI)
सरकार के पास प्याज का कितना स्टॉक है?
हर साल आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए सरकार प्याज जमा करके रखती है। इसे बफर स्टॉक कहा जाता है। केंद्र सरकार के पास इस साल 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक मौजूद है। इस स्टॉक का प्रबंधन दो प्रमुख सरकारी संस्थाएं करती हैं। इनके नाम 'भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ' (NCCF) और 'भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ' (NAFED) हैं। ये संस्थाएं प्याज पैदा करने वाले राज्यों से माल खरीदती हैं और इसे उन शहरों तक पहुंचाती हैं जहां प्याज की कमी या महंगाई ज्यादा है।
35 रुपये प्रति किलो की दर से मिल रहा प्याज
बाजार में प्याज की कीमतें काफी बढ़ गई थीं। ऐसे में सरकार ने चुनिंदा शहरों में रियायती दरों पर प्याज बेचने का फैसला किया। ग्राहकों को यह प्याज 35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि सस्ते दाम पर प्याज मिलने से उपभोक्ताओं को सीधा फायदा होगा। जो प्याज सरकार बेच रही है, उसकी गुणवत्ता और आकार वैसा ही है जैसा आम बाजार में निजी व्यापारी बेचते हैं। यानी गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया गया है।
'कांदा एक्सप्रेस' ट्रेन से तेजी से पहुंच रहा माल
देश के कोने-कोने तक प्याज जल्दी पहुंचाने के लिए सरकार ने विशेष ट्रेनें चलाई हैं। इन समर्पित रेल रैक का नाम 'कांदा एक्सप्रेस' रखा गया है। इसके अलावा बड़े-बड़े ट्रकों का भी इस्तेमाल हो रहा है। कांदा एक्सप्रेस के जरिए दिल्ली और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में प्याज की बड़ी खेप भेजी जा चुकी है। अब इसकी तीसरी खेप गुवाहाटी भेजी जा रही है। रेल परिवहन के इस्तेमाल से प्याज की आपूर्ति बहुत तेजी से हो रही है।
एनसीसीएफ की अहम भूमिका
इस पूरी मुहिम में एनसीसीएफ (NCCF) की बड़ी भूमिका है। एनसीसीएफ की प्रबंध निदेशक अनीस जोसेफ चंद्रा ने बताया कि अकेले उनकी संस्था ने अब तक 1,500 टन बफर प्याज बेचा है। संस्था का मुख्य ध्यान खुदरा बिक्री पर है। वे गाड़ियों और वैन के जरिए सीधे उपभोक्ताओं को 35 रुपये प्रति किलो में प्याज उपलब्ध करा रहे हैं। इससे आम खरीदार सीधे दुकान तक पहुंचे बिना सस्ता प्याज पा रहे हैं।
प्याज की कीमतें क्यों बढ़ीं?
प्याज की कीमतें बढ़ने के पीछे खराब मौसम एक बड़ी वजह है। देश में रबी फसल के प्याज को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जाता है। लेकिन इस साल फसल की कटाई के समय बेमौसम बारिश हो गई। इस बारिश के कारण प्याज की फसल को काफी नुकसान पहुंचा। फसल खराब होने से बाजार में प्याज की आवक कम हो गई और कीमतें तेजी से बढ़ने लगीं।
बाजार पर इस कदम का असर
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में प्याज का औसत खुदरा मूल्य पहले 48.50 रुपये प्रति किलोग्राम था। कुछ दिनों बाद यह बढ़कर 50.79 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया था। हालांकि, रियायती दर पर प्याज बेचने से बाजार को थोड़ी राहत मिली है। सरकारी सचिव निधि खरे के मुताबिक, बफर प्याज की बिक्री शुरू होने के बाद कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। सरकार को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में आपूर्ति सामान्य होने पर कीमतें पूरी तरह नियंत्रण में आ जाएंगी।
