Onion Inflation: देश में प्याज की पैदावार लगभग पिछले साल जितनी ही है। खेती का रकबा घटने के बजाय बढ़ा है। सरकार ने प्याज का बंपर बफर स्टॉक भी तैयार किया है। इसके अलावा बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए ट्रेनों से लेकर ट्रकों तक का इस्तेमाल हो रहा।
खेत में सस्ता बाजार में महंगा हुआ प्याज
इसके बावजूद सितंबर 2026 में प्याज की सालाना महंगाई दर 108.09% पर पहुंच गई। अब सवाल यह है कि जब फसल में बड़ी गिरावट नहीं आई और महाराष्ट्र की मंडियों में प्याज के भाव भी नीचे आने लगे, तो आखिर महंगाई इतनी ज्यादा कैसे हो गई?
इस कहानी में सबसे दिलचस्प मोड़ यह है कि 12 अक्टूबर को महंगाई के आंकड़े सामने आने से पहले ही सरकार महाराष्ट्र की मंडियों में प्याज की कीमतें घटने की जानकारी दे चुकी थी। 16 सितंबर को करीब ₹4,030 प्रति क्विंटल रहने वाला औसत थोक भाव 3 अक्टूबर तक गिरकर लगभग ₹3,475 प्रति क्विंटल रह गया। यानी करीब 14% की गिरावट।
प्याज का रकबा बढ़ा
आमतौर पर प्याज की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तो सबसे पहले फसल खराब होने या उत्पादन घटने की बात सामने आती है। लेकिन इस बार कृषि मंत्रालय के आंकड़े कुछ अलग तस्वीर दिखाते हैं।
मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक अग्रिम अनुमानों के हिसाब से देखें, तो वित्त वर्ष 2026 में देश में प्याज का उत्पादन 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है। जबकि, इससे पहले 2025 में यह उत्पादन 307.67 लाख टन था। यानी उत्पादन में सिर्फ 0.10% की मामूली गिरावट का अनुमान है। दूसरी तरफ, प्याज की खेती का रकबा 2.31% बढ़ने का अनुमान है।
खेत में प्याज पर बाजार से गायब
प्याज की सप्लाई चेन दूसरी सब्जियों से अलग होती है। इसकी फसल का एक हिस्सा स्टोर करके रखा जाता है, ताकि नई फसल आने तक बाजार में सप्लाई बनी रहे। लेकिन स्टोरेज के दौरान प्याज में नमी, अंकुरण, सड़ने और वजन कम होने जैसी समस्याएं आती हैं।
ऐसे में पूरे साल उत्पादन पर्याप्त होने के बावजूद किसी खास अवधि में मंडियों तक पहुंचने वाली प्याज की मात्रा प्रभावित हो सकती है। नई फसल की आवक, पुराने स्टॉक की उपलब्धता और अलग-अलग क्षेत्रों तक माल पहुंचने की गति भी कीमतों पर असर डालती है।
सरकार के बफर स्टॉक का क्या हुआ?
प्याज की कीमतों को काबू करने के लिए सरकार प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड (PSF) के तहत बफर स्टॉक बनाती है। जरूरत पड़ने पर इस स्टॉक से प्याज बाजार में उतारा जाता है, ताकि उपलब्धता बढ़े और कीमतों पर दबाव कम हो।
सरकार ने 2023-24 में प्याज के बफर का लक्ष्य बढ़ाकर 7 लाख टन किया था और उस साल करीब 6.39 लाख टन खरीद की गई थी। इसके अलावा
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने 2 लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा था। वहीं, 4 जुलाई को सरकार ने किसानों से प्याज खरीदने का भाव ₹1,875 से बढ़ाकर ₹2,125 प्रति क्विंटल कर दिया था।
प्याज की सस्ती सप्लाई बेअसर
अगस्त के अंतिम सप्ताह में सरकार ने बफर स्टॉक से प्याज जारी करना शुरू किया। 7 अक्टूबर तक सरकार के मुताबिक, 123 शहरों में 2 लाख क्विंटल से अधिक यानी 20,000 टन से ज्यादा बफर प्याज जारी किया जा चुका था। इसकी ढुलाई आठ कांदा एक्सप्रेस ट्रेनों और 467 ट्रकों से की गई। बफर स्टॉक से निकाले गए प्याज की बिक्री NAFED और NCCF समेत संबंधित बिक्री केंद्रों के माध्यम से ₹35 प्रति किलो की दर से भी की गई।
थोक मंडियों में गिरे दाम
अक्टूबर की शुरुआत में प्याज की कीमतों को लेकर तस्वीर बदलने लगी है। सरकार के 7 अक्टूबर के बयान के मुताबिक, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और राजस्थान से नई खरीफ प्याज की आवक शुरू हो गई थी। साथ ही पुरानी फसल का स्टॉक भी उपलब्धता बनाए रखने में मदद कर रहा था।
सरकार ने यह भी बताया कि खरीफ प्याज का रकबा पिछले साल के मजबूत स्तर से करीब 5% अधिक रहने का अनुमान था। वहीं, इस दौरान महाराष्ट्र में 16 सितंबर को करीब ₹4,030 प्रति क्विंटल रहा औसत थोक भाव 3 अक्टूबर तक घटकर लगभग ₹3,475 रह गया। इस दौरान 126 शहरों में खुदरा कीमतों में ₹1 से ₹21 प्रति किलो तक की गिरावट भी दर्ज हुई।
कैसे 108% पहुंची महंगाई?
सितंबर 2026 में प्याज की सालाना महंगाई दर 108.09% दर्ज हुई। यह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में सितंबर 2026 और सितंबर 2025 के बीच का अंतर है। इसका मतलब यह नहीं है कि प्याज सितंबर महीने में ही 108% महंगा हो गया।
सालाना महंगाई दर की गणना में पिछले साल का मूल्य स्तर भी महत्वपूर्ण होता है। अगर सितंबर 2025 में कीमतों का सूचकांक कम था, तो सितंबर 2026 में उसके मुकाबले बना बड़ा अंतर सालाना महंगाई दर को बहुत ऊंचा दिखा सकता है।
सितंबर के आंकड़ों में प्याज की महंगाई दर अगस्त के 48.78% से बढ़कर 108.09% हो गई। लेकिन यहां अवधि का अंतर समझना जरूरी है: CPI का आंकड़ा सितंबर 2026 की तुलना सितंबर 2025 से करता है, जबकि महाराष्ट्र में थोक भाव की गिरावट 16 सितंबर से 3 अक्टूबर के बीच दर्ज हुई।
