शेयर बाजार में पैसा कमाने के लिए सही शेयर चुनना जरूरी है, लेकिन दौलत बचाने के लिए एक और हुनर चाहिए। यह पहचानने का हुनर कि आपका फैसला गलत साबित हो रहा है।
अंदर का रावण कराता है नुकसान
दिग्गज निवेशक विजय केडिया ने विजयदशमी के मौके पर इसी बात को बेहद दिलचस्प अंदाज में समझाया है। उन्होंने रावण की कहानी को निवेश की दुनिया से जोड़ते हुए कहा कि हर निवेशक के अंदर एक छोटा-सा रावण होता है।
रावण विद्वान था, शक्तिशाली था और उसके पास अपार वैभव था। फिर भी उसका अंत हुआ। वजह यह नहीं थी कि उसे ज्ञान की कमी थी, बल्कि वह अपने गलत फैसले पर दोबारा विचार करने को तैयार नहीं था।
विजय केडिया ने क्या कहा?
विजय केडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने विजयदशमी संदेश में इसी बात की ओर इशारा किया। उन्होंने लिखा कि रावण के पास प्रतिभा, ज्ञान, शक्ति और दौलत सब कुछ था, लेकिन उसमें यह समझने की बुद्धि नहीं थी कि वह कब गलत है। एक विनाशकारी फैसले पर दोबारा विचार न करने की जिद ने उससे सब कुछ छीन लिया। केडिया ने इसी संदर्भ में कहा, 'There is a little Ravana in every investor' यानी हर निवेशक के भीतर थोड़ा-सा रावण मौजूद है।
उनकी यह बात शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के लिए एक अहम सबक है। कई बार नुकसान जानकारी की कमी से नहीं, बल्कि अपने फैसले पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करने के कारण होता है।
क्यों नहीं डूब जाते हैं निवेशक?
मान लीजिए, आपने किसी कंपनी का शेयर यह सोचकर खरीदा कि उसका कारोबार आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ेगा। शुरुआत में कंपनी के नतीजे अच्छे रहे, लेकिन बाद में बिक्री कमजोर होने लगी। मुनाफे पर दबाव आया और कंपनी के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे।
ऐसे में समझदार निवेशक सबसे पहले यह देखेगा कि शेयर खरीदने की उसकी मूल वजह अब भी कायम है या नहीं। लेकिन कई निवेशक ऐसा करने के बजाय खुद को समझाते रहते हैं कि बाजार फिलहाल कंपनी की असली क्षमता को नहीं पहचान रहा।
शेयर और गिरता है, तो वे और खरीद लेते हैं। गिरावट बढ़ती है, तो पहले किए गए विश्लेषण को सही साबित करने की कोशिश करते हैं। कई बार वे इसलिए भी नहीं बेचते, क्योंकि उन्हें नुकसान स्वीकार करना मुश्किल लगता है।
गलती मान लेना जरूरी
विजय केडिया का सबसे अहम संदेश यही है कि निवेश में सही होना आपको पैसा कमाकर दे सकता है, लेकिन अपनी गलती पहचानना आपकी दौलत बचा सकता है।
शेयर बाजार में हर अनुमान सही नहीं हो सकता। किसी कंपनी की ग्रोथ उम्मीद से कमजोर रह सकती है, मैनेजमेंट को लेकर नई चिंताएं सामने आ सकती हैं या पूरे सेक्टर की परिस्थितियां बदल सकती हैं। ऐसे में पुराने विश्लेषण से चिपके रहना समझदारी नहीं है।
निवेशक अपने अंदर के रावण को कैसे पहचानें?
विजय केडिया कहते हैं। इसके लिए किसी बड़े फॉर्मूले की जरूरत नहीं है। निवेशक कुछ सीधे सवाल खुद से पूछ सकते हैं।
- पहला, मैंने यह शेयर किस वजह से खरीदा था? क्या वे वजहें आज भी सही हैं?
- दूसरा, कौन-सी नई जानकारी मुझे अपना फैसला बदलने के लिए मजबूर कर सकती है?
- तीसरा, क्या मैं इस शेयर को इसलिए पकड़े हुए हूं क्योंकि इसका भविष्य बेहतर दिख रहा है या सिर्फ इसलिए कि मैं अपना नुकसान स्वीकार नहीं करना चाहता?
इस विजयदशमी पर अपने भीतर झांकने का मौका
विजयदशमी पर रावण के पुतले का दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। निवेश की दुनिया में इस प्रतीक को एक अलग अर्थ में भी देखा जा सकता है। यहां रावण अहंकार, जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास और अपनी गलती स्वीकार न करने की आदत का प्रतीक बन जाता है।
विजय केडिया का संदेश यही याद दिलाता है कि केवल ज्ञान, अनुभव और विश्लेषण ही पर्याप्त नहीं हैं। अपनी सोच पर सवाल उठाने और जरूरत पड़ने पर उसे बदलने की क्षमता भी उतनी ही जरूरी है।
क्योंकि शेयर बाजार में हर बार सही साबित होना किसी के बस में नहीं है। लेकिन गलत साबित होने पर समय रहते संभलना आपके हाथ में जरूर है।
