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Credit Card Refund और Chargeback में क्या है अंतर? पैसा वापस पाने का क्या है सही तरीका

Credit Card Refund vs Chargeback: क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन शॉपिंग करते समय ऑर्डर कैंसिल होने पर ग्राहक के पास रिफंड और चार्जबैक जैसे विकल्प होते हैं। लेकिन इन दोनों विकल्प में अंतर क्या है, यह समझना भी जरूरी है।

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क्रेडिट कार्ड रिफंड और चार्जबैक में क्या है अंतर (Photo: iStock)

Credit Card Refund vs Chargeback: क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन शॉपिंग करते समय कई बार ऑर्डर कैंसिल होने, सामान नहीं मिलने या गलत बिलिंग के कारण परेशानी हो सकती है। ऐसी स्थिति में ग्राहक के पास पैसे वापस पाने के लिए रिफंड और चार्जबैक जैसे विकल्प होते हैं। हालांकि, दोनों प्रक्रियाएं अलग-अलग हैं और इनका इस्तेमाल स्थिति के अनुसार करना चाहिए। आइए जानते हैं कि क्रेडिट कार्ड रिफंड और चार्जबैक में क्या अंतर है -

क्या होता है क्रेडिट कार्ड रिफंड?

जब ग्राहक किसी सामान को वापस करता है, ऑर्डर कैंसिल करता है या बिल में गलती पाता है, तो वह दुकानदार या कंपनी से रिफंड मांग सकता है। इस प्रक्रिया में मर्चेंट यानी विक्रेता पेमेंट वापस करने की प्रक्रिया शुरू करता है। इसके बाद पैसा ग्राहक के क्रेडिट कार्ड (Credit Card) खाते में वापस आ जाता है।

उदाहरण के लिए आपने ऑनलाइन 7,000 रुपये का सामान खरीदा, लेकिन ऑर्डर कैंसिल कर दिया। ऐसी स्थिति में आप ई-कॉमर्स कंपनी से रिफंड मांग सकते हैं। हालांकि, रिफंड मिलने में कुछ वर्किंग डे लग सकते हैं। इसके लिए ऑर्डर की जानकारी, पेमेंट की जानकारी और विक्रेता के साथ हुई बातचीत का रिकॉर्ड संभालकर रखना चाहिए।

कब करना चाहिए चार्जबैक का इस्तेमाल?

अगर मर्चेंट वैलिड रिफंड देने से मना कर देता है, शिकायत का जवाब नहीं देता या पेमेंट के बावजूद सामान या सर्विस नहीं मिलती, तो ग्राहक अपने क्रेडिट कार्ड जारी करने वाले बैंक से चार्जबैक के लिए संपर्क कर सकता है। अनऑथराइज्ड ट्रांजैक्शन या धोखाधड़ी के संदेह में भी बैंक को तुरंत जानकारी देनी चाहिए।

चार्जबैक में बैंक विवादित ट्रांजैक्शन की जांच करता है। ग्राहक को पेमेंट की डिटेल्स, रसीद और मर्चेंट के साथ हुई बातचीत जैसे सबूत देने पड़ सकते हैं। हालांकि, चार्जबैक मंजूर होना जरूरी नहीं है। विक्रेता भी अपने पक्ष में सबूत पेश कर सकता है। इसलिए बैंक की तय समयसीमा के भीतर शिकायत करना जरूरी है।

रिफंड और चार्जबैक में क्या है अंतर?

रिफंड की प्रक्रिया आमतौर पर विक्रेता के जरिए शुरू होती है, जबकि चार्जबैक के लिए ग्राहक बैंक से संपर्क करता है। रिफंड में पैसा वापस मिलने का समय मर्चेंट की प्रक्रिया पर निर्भर करता है, जबकि चार्जबैक की जांच में कई हफ्ते लग सकते हैं। क्रेडिट कार्ड रिफंड या चार्जबैक की रिक्वेस्ट करने से आमतौर पर क्रेडिट स्कोर पर सीधा असर नहीं पड़ता। हालांकि, विवाद के दौरान कार्ड का बकाया बिल न चुकाने या भुगतान में देरी करने से क्रेडिट स्कोर प्रभावित हो सकता है।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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