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बाजार में तबाही के बीच 3 शेयरों पर FII ने लगाया दांव, 3 महीने में की जमकर खरीदारी

भारतीय शेयर बाजार जहां पिछले 2 साल से बुरी तरह पिट रहा है। विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। लेकिन, इस बीच 3 स्टॉक्स ऐसे हैं, जिनमें FII ने जमकर खरीदारी की है।

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इन स्टॉक्स में विदेशी निवेशकों की बढ़ी हिस्सेदारी

High FII Stocks in India Stocks Market : शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच 3 स्मॉलकैप (Smallcap) शेयरों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की दिलचस्पी बढ़ी है।

जुलाई-सितंबर 2026 की तिमाही में स्किपर (Skipper), सेडेमैक मेक्ट्रोनिक्स (Sedemac Mechatronics) और ट्यूरिज्म फाइनेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (TFCI) में विदेशी निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई। इन कंपनियों में कारोबार की ग्रोथ, नए ऑर्डर और मुनाफे में बढ़ोतरी निवेशकों के आकर्षण की वजह हो सकते हैं।

16 अक्टूबर, 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर, ₹5,000 करोड़ से ₹20,000 करोड़ के बीच मार्केट कैप वाली कंपनियों में उन शेयरों को चुना गया, जिनमें सितंबर तिमाही के दौरान FII की हिस्सेदारी कम से कम 2 प्रतिशत अंक बढ़ी।

Skipper ₹9,217 करोड़ का ऑर्डर बुक

Skipper पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन इंफ्रास्ट्रक्चर के कारोबार में है। कंपनी ट्रांसमिशन टावर, मोनोपोल और PVC व HDPE पाइप बनाती है।

जुलाई-सितंबर तिमाही में FII की हिस्सेदारी 6.20 प्रतिशत अंक बढ़कर 10.31% हो गई। Smallcap World Fund ने कंपनी में 4.83% की नई हिस्सेदारी खरीदी।

अगस्त और सितंबर में कंपनी को कुल ₹2,102 करोड़ के नए ऑर्डर मिले। जून 2026 के अंत में इसका ऑर्डर बुक रिकॉर्ड ₹9,217 करोड़ था। कंपनी अपनी सालाना मैन्युफैक्चरिंग क्षमता 3.75 लाख टन से बढ़ाकर 4.5 लाख टन करने पर काम कर रही है।

वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में रेवेन्यू 4.5% बढ़कर ₹1,309.8 करोड़ और नेट प्रॉफिट 26.5% बढ़कर ₹56.5 करोड़ रहा। हालांकि, कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो 0.63 गुना था, जो इंडस्ट्री के औसत से ज्यादा है।

सेडेमैक मेक्ट्रोनिक्स मुनाफे में 95% की बढ़ोतरी

Sedemac Mechatronics ऑटो एंसिलरी सेक्टर की कंपनी है, जो गाड़ियों और औद्योगिक उपकरणों के लिए Electronic Control Units (ECU) बनाती है।

सितंबर तिमाही में FII की हिस्सेदारी 6.03 प्रतिशत अंक बढ़कर 10.30% पहुंच गई। Government of Singapore ने 2.32% हिस्सेदारी खरीदी।

जून 2026 तक समाप्त पिछले 12 महीनों में कंपनी की ECU बिक्री करीब 52.7% बढ़कर 42 लाख यूनिट हो गई। सितंबर में कंपनी ने पुणे में अपनी तीसरी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू किया।

पहली तिमाही में रेवेन्यू 43% बढ़कर ₹310 करोड़ और नेट प्रॉफिट 95% बढ़कर ₹33 करोड़ रहा। हालांकि, EBITDA मार्जिन घटकर 19.4% रह गया। कंपनी का P/E रेशियो 121.96 गुना था, जो इंडस्ट्री के औसत 29.16 गुना से काफी अधिक है।

TFCI के नेट प्रॉफिट दोगुना

TFCI होटल, रिसॉर्ट और पर्यटन से जुड़े कारोबारों को वित्तीय सहायता देती है। तिमाही में FII की हिस्सेदारी 4 प्रतिशत अंक बढ़कर 9.46% हो गई। कंपनी का ग्रॉस AUM जून 2026 में सालाना आधार पर 17% बढ़कर ₹2,002.05 करोड़ रहा।

पहली तिमाही में कुल इनकम 75% बढ़कर ₹115.15 करोड़ और नेट प्रॉफिट दोगुना होकर ₹61.21 करोड़ पहुंच गया। हालांकि, इसका P/E रेशियो 46.8 गुना था, जबकि इंडस्ट्री का औसत 14.9 गुना था। कंपनी का ROE भी इंडस्ट्री के औसत से कम रहा।

डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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