Old Pension Scheme : नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली को लेकर केंद्र सरकार ने अपना रुख पूरी तरह साफ कर दिया है। सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना को वापस लाने का कोई विचार नहीं है। सरकार का तर्क है कि ओपीएस की वजह से सरकारी खजाने पर वित्तीय बोझ बहुत अधिक पड़ता था, जिससे वित्तीय संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो गया था। इसलिए, सरकार का इस दिशा में दोबारा कदम बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है।
पुरानी पेंशन की मांग पर केंद्र का पूर्णविराम!
राज्यों के पास अधिकार, लेकिन CAG ने चेताया
10 अगस्त 2026 को लोकसभा में एक लिखित उत्तर देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि राज्य सरकारें अपने कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने या न करने का फैसला खुद ले सकती हैं। यह पूरी तरह से राज्यों की नीति का मामला है। हालांकि, इसके साथ ही केंद्र सरकार ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट का हवाला भी दिया। कैग की राज्य वित्त लेखा परीक्षा रिपोर्टों में ओपीएस को फिर से लागू करने पर पड़ने वाले भारी वित्तीय प्रभाव और बजटीय दबाव के प्रति चेतावनी दी गई है।
विकल्प के रूप में आई एकीकृत पेंशन योजना (UPS)
केंद्र सरकार ने साफ किया है कि एनपीएस से जुड़े कर्मचारियों की चिंताओं को दूर करने के लिए उसने 1 अप्रैल 2025 से एकीकृत पेंशन योजना यानी यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) लागू की है। यूपीएस को एनपीएस के भीतर ही एक बेहतर विकल्प के रूप में पेश किया गया है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को उनकी सेवानिवृत्ति के बाद एक निश्चित आय की गारंटी देना है। इसमें महंगाई से जुड़ी सुनिश्चित पेंशन और कम से कम 10,000 रुपये प्रति माह की न्यूनतम पेंशन का प्रावधान किया गया है।
ओपीएस (OPS) बनाम एनपीएस (NPS)
पुरानी पेंशन योजना (OPS) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में सबसे बड़ा अंतर इस बात का है कि रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली राशि का निर्धारण कैसे होता है। ओपीएस एक 'निश्चित लाभ' वाली योजना थी, जिसमें पेंशन का भुगतान सरकार के बजट से किया जाता था और यह कर्मचारी के अंतिम वेतन तथा सेवा अवधि पर आधारित होती थी। इसके विपरीत 1 जनवरी 2004 से लागू एनपीएस एक 'अंशदायी' यानी कंट्रीब्यूटरी योजना है। इसमें कर्मचारी और सरकार दोनों मिलकर योगदान करते हैं। बाजार के उतार-चढ़ाव और निवेश के रिटर्न के आधार पर ही एनपीएस का अंतिम पेंशन कॉर्पस तय होता है।
कर्मचारी एनपीएस से नाराज क्यों हैं?
एनपीएस को लेकर कर्मचारियों की सबसे बड़ी शिकायत भविष्य की अनिश्चितता को लेकर रही है। चूंकि एनपीएस में मिलने वाला लाभ बाजार के प्रदर्शन और निवेश रिटर्न पर निर्भर करता है, इसलिए इसमें निश्चित पेंशन की कोई गारंटी नहीं होती। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि समान वेतन और समान सेवा अवधि वाले दो कर्मचारियों को बाजार के जोखिमों के कारण अलग-अलग पेंशन मिल सकती है। कर्मचारियों द्वारा उठाई गई इन्हीं शिकायतों और बाजार जोखिमों के समाधान के लिए सरकार ने यूपीएस का मार्ग चुना।
एकीकृत पेंशन योजना (UPS) की प्रमुख विशेषताएं
यूपीएस को पुरानी पेंशन योजना और एनपीएस के बीच के एक मध्य मार्ग के रूप में देखा जा रहा है। अगर कोई कर्मचारी कम से कम 25 साल की सेवा पूरी करता है, तो उसे सेवानिवृत्ति से ठीक पहले के 12 महीनों के औसत मूल वेतन का 50 प्रतिशत भाग सुनिश्चित पेंशन के रूप में मिलेगा। 10 से 25 वर्ष की सेवा वाले कर्मचारियों को सेवा की अवधि के अनुपात में पेंशन दी जाएगी। इसके अलावा, यूपीएस में महंगाई राहत के माध्यम से महंगाई से सुरक्षा भी शामिल है। कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में उसके जीवनसाथी को 60 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन का प्रावधान भी किया गया है।
यूपीएस और ओपीएस में अंतर समझना जरूरी
निश्चित पेंशन का वादा करने के बावजूद यूपीएस को ओपीएस समझने की भूल नहीं की जानी चाहिए। ओपीएस की तरह यह पूरी तरह से सरकार के बजटीय खर्च पर निर्भर नहीं है। यूपीएस भी एक अंशदायी और फंड-आधारित प्रणाली ही है। यूपीएस के तहत कर्मचारी अपना योगदान देता है और सरकार कर्मचारी के मूल वेतन व महंगाई भत्ते का 10 प्रतिशत हिस्सा उसके व्यक्तिगत पेंशन फंड में तथा 8.5 प्रतिशत हिस्सा एक केंद्रीय पूल फंड में जमा करती है। इस तरह यह योजना पेंशन की अनिश्चितता को दूर करते हुए भी फंड-आधारित ढांचे को बनाए रखती है।
एकमुश्त राशि और स्विच करने का एकतरफा विकल्प
यूपीएस की एक और बड़ी विशेषता यह है कि सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी को ग्रेच्युटी के अलावा एकमुश्त राशि भी मिलती है। यह राशि हर छह महीने की पूरी की गई सेवा के बदले मासिक वेतन (मूल वेतन + डीए) के 10वें हिस्से के बराबर होती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस एकमुश्त राशि से मासिक पेंशन में कोई कटौती नहीं की जाती। इसके अलावा, सरकार ने कर्मचारियों को यूपीएस से एनपीएस में जाने के लिए एक बार का मौका दिया है, लेकिन यदि कोई कर्मचारी यूपीएस चुन लेता है तो वह दोबारा एनपीएस से यूपीएस में नहीं लौट सकता।
एनपीएस फंड और कर्मचारियों का भविष्य
संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, 26 जुलाई 2026 तक केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए एनपीएस के तहत प्रबंधित कुल परिसंपत्तियां (AUM) 3.65 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई हैं। अगर पूरे एनपीएस तंत्र की बात करें तो मार्च 2026 तक यह आंकड़ा करीब 15.95 लाख करोड़ रुपये हो चुका है। इससे स्पष्ट होता है कि इस पूरी प्रणाली को पुरानी व्यवस्था पर वापस ले जाना कितना जटिल और वित्तीय रूप से जोखिम भरा हो सकता है।
केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए अब ओपीएस का रास्ता पूरी तरह बंद हो चुका है और उनके सामने एनपीएस तथा यूपीएस के रूप में दो विकल्प मौजूद हैं। राज्य सरकारों के कर्मचारियों के लिए फैसला उनके अपने राज्यों के पास है, लेकिन वित्तीय स्थिति को देखते हुए राज्यों पर भी भारी दबाव है।
