Indian billionaires: देश में बहुत अधिक आय वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। सरकार ने संसद में बताया है कि वित्त वर्ष 2025-26 के आकलन वर्ष (AY 2025-26) में 576 लोगों ने अपनी आय 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक घोषित की है। यह संख्या 5 साल पहले के मुकाबले करीब 4 गुना हो गई है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में लिखित जवाब में यह जानकारी दी। मंत्री ने बताया कि सरकार के पास बिलियनेयर (अरबपति) की कोई कानूनी परिभाषा नहीं है। न तो पुराने इनकम टैक्स अधिनियम, 1961 और न ही नए इनकम टैक्स अधिनियम, 2025 में इस शब्द को परिभाषित किया गया है। इसलिए सरकार इनकम टैक्स रिटर्न में घोषित आय के आधार पर ही ऐसे आंकड़े जारी करती है।
भारत में बढ़ रहा ₹100 करोड़ क्लब! सरकार ने संसद में पेश किए चौंकाने वाले आंकड़े
पांच साल में कैसे बढ़ी संख्या
लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, आकलन वर्ष 2021-22 में 142 लोगों ने 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक की आय घोषित की थी। यह संख्या 2022-23 में बढ़कर 301 हो गई। इसके बाद 2023-24 में मामूली गिरावट के साथ 284 रह गई, लेकिन फिर 2024-25 में 415 और 2025-26 में 576 तक पहुंच गई। इससे साफ है कि देश में बेहद अधिक आय वाले टैक्सपेयर्स की संख्या लगातार बढ़ रही है।
संपत्ति और आय में असमानता पर सरकार का जवाब
संसद में सरकार से यह भी पूछा गया कि क्या बढ़ती संपत्ति और आय की असमानता को लेकर कोई अध्ययन किया गया है। इसके जवाब में वित्त राज्य मंत्री ने कहा कि सरकार लगातार रोजगार, गरीबी और आय से जुड़े विभिन्न सर्वेक्षणों के जरिए स्थिति पर नजर रख रही है। उन्होंने बताया कि सरकार की पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) रिपोर्ट के अनुसार, शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति कोरोना महामारी से पहले के स्तर से भी बेहतर हुई है। 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों की बेरोजगारी दर 2022 में 3.6 प्रतिशत थी, जो 2025 में घटकर 3.1 प्रतिशत रह गई है।
गांव और शहर के बीच कम हो रहा अंतर
सरकार ने हाउसहोल्ड कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर सर्वे 2023-24 का भी हवाला दिया। इसके अनुसार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आय और उपभोग से जुड़ी असमानता पहले की तुलना में कम हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों का गिनी गुणांक 0.266 से घटकर 0.237 और शहरी क्षेत्रों का 0.314 से घटकर 0.284 हो गया है। इसका मतलब है कि गांव और शहर के बीच आर्थिक असमानता धीरे-धीरे कम हो रही है।
करोड़ों लोग गरीबी से बाहर आए
नीति आयोग की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि देश में बहुआयामी गरीबी में लगातार कमी आई है। 2015-16 से 2019-21 के बीच करीब 13.5 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले। वहीं, एक अन्य अध्ययन के अनुसार 2013-14 से 2022-23 के बीच लगभग 24.82 करोड़ लोगों ने बहुआयामी गरीबी से बाहर निकलने में सफलता हासिल की है।
सरकार ने उठाए कई कदम
वित्त राज्य मंत्री ने कहा कि सरकार आय और संपत्ति की असमानता कम करने तथा समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है। इनमें प्रगतिशील आयकर व्यवस्था, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर बढ़ा हुआ सरकारी खर्च शामिल है। इन योजनाओं का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों तक विकास का लाभ पहुंचाना है।
वेल्थ टैक्स नहीं, लेकिन ज्यादा आय वालों पर सरचार्ज
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वेल्थ टैक्स एक्ट, 1957 को अप्रैल 2016 में समाप्त कर दिया गया था। इसलिए सरकार के पास करदाताओं की कुल संपत्ति का अलग से कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। हालांकि, जिन लोगों की आय बहुत अधिक होती है, उनसे सामान्य आयकर के अलावा निर्धारित नियमों के अनुसार अतिरिक्त सरचार्ज भी लिया जाता है।
