मिडल ईस्ट में बढ़ते तनाव और इजरायल-ईरान के बीच युद्ध जैसे हालात ने पूरी दुनिया में कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं देशों से आयात करता है, ऐसे में आम जनता के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या देश में पेट्रोल, डीजल या रसोई गैस (LPG) की किल्लत हो सकती है? इन चिंताओं के बीच केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि भारत के पास पर्याप्त मात्रा में ईंधन का स्टॉक मौजूद है। देश की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को लेकर सरकार पूरी तरह मुस्तैद है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए हमारे पास मजबूत 'बैकअप प्लान' तैयार है।
पीआईबी (PIB) द्वारा जारी ताजा जानकारी के अनुसार, भारत आज दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और पेट्रोलियम उत्पादों का 5वां सबसे बड़ा निर्यातक बन चुका है। हम दुनिया के 150 से अधिक देशों को रिफाइंड ईंधन (जैसे पेट्रोल-डीजल) की सप्लाई करते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि भारत अपनी जरूरत से ज्यादा तेल रिफाइन करने की क्षमता रखता है, इसलिए घरेलू स्तर पर ईंधन की उपलब्धता को लेकर कोई खतरा नहीं है।
कितने दिनों का स्टॉक है हमारे पास?
सरकार ने आंकड़ों के साथ बताया है कि भारतीय तेल कंपनियों ने अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति का 'कॉन्ट्रैक्ट' (अनुबंध) पहले ही सुरक्षित कर लिया है। भारत की कुल तेल भंडारण क्षमता वैसे तो 74 दिनों की है, लेकिन वर्तमान में हमारे पास 60 दिनों का वास्तविक स्टॉक उपलब्ध है। इस स्टॉक में कच्चा तेल (Crude Oil) और जमीन के नीचे बनी विशाल गुफाओं (Strategic Reserves) में जमा 'इमरजेंसी' ईंधन भी शामिल है। गौर करने वाली बात यह है कि मिडल ईस्ट संकट को आज 27 दिन बीत चुके हैं, फिर भी भारत ने अगले 2 महीनों की तेल खरीद को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। देश भर के 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंप बिना किसी रुकावट के खुले हैं।
LPG (रसोई गैस) सप्लाई भी नियंत्रित
रसोई गैस को लेकर भी सरकार ने बड़ी राहत दी है। मंत्रालय के 'एलपीजी नियंत्रण आदेश' के बाद घरेलू रिफाइनरियों में एलपीजी के उत्पादन में 40% की भारी बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान में भारत की दैनिक आवश्यकता लगभग 80 टीएमटी (TMT) है, जिसमें से 60% से अधिक हिस्सा (लगभग 50 टीएमटी) हमारे अपने देश में ही तैयार हो रहा है। तेल कंपनियां हर दिन 50 लाख से ज्यादा सिलेंडरों की सफलतापूर्वक डिलीवरी कर रही हैं।
अफवाहों से बढ़ा था संकट
प्रेस रिलीज में यह भी खुलासा हुआ कि बीच में कुछ अफवाहों और घबराहट (Panic Buying) के कारण सिलेंडरों की मांग अचानक 50 लाख से बढ़कर 89 लाख तक पहुंच गई थी। लोग जरूरत से ज्यादा सिलेंडर बुक करने लगे थे, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव पड़ा। लेकिन अब स्थिति फिर से सामान्य हो गई है और बुकिंग फिर से 50 लाख के सामान्य स्तर पर आ गई है। सरकार ने अपील की है कि उपभोक्ता घबराकर एक्स्ट्रा बुकिंग न करें, क्योंकि गैस की कोई कमी नहीं है।
भारत ने भविष्य के संकटों को देखते हुए जमीन के नीचे कच्चे तेल का एक बड़ा भंडार जमा कर रखा है, जिसे 'स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व' कहा जाता है। वर्तमान में भारत के पास विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में ये भंडार मौजूद हैं।
जमाखोरी और अफवाहों से बचें
अक्सर युद्ध या संकट की खबरों के बीच लोग घबराहट में आकर पेट्रोल पंपों पर लाइन लगाने लगते हैं या गैस सिलेंडरों की जमाखोरी शुरू कर देते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन की कोई भौतिक कमी नहीं है। तेल डिपो और रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। पेट्रोलियम मंत्री ने भी समय-समय पर सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी है कि भारत की ऊर्जा दीवारें काफी मजबूत हैं और आम जनता को घबराने की जरूरत नहीं है।
