1 अप्रैल से लागू हो रहा न्यू इनकम टैक्स एक्ट, डेडलाइन से लेकर असेसमेंट ईयर तक... टैक्सपेयर्स के लिए जरुरी हैं 9 चीजें

भारत में कर व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने के लिए 1 अप्रैल 2026 से 'न्यू इनकम टैक्स एक्ट' लागू होने जा रहा है। यह बदलाव केवल टैक्स दरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आईटीआर (ITR) फाइलिंग की डेडलाइन, असेसमेंट के तरीके और एचआरए (HRA) जैसे कई महत्वपूर्ण नियमों को बदला गया है।

भारत में हर साल 1 अप्रैल से नया वित्त वर्ष (Financial Year) शुरू होता है, लेकिन इस बार का 1 अप्रैल टैक्सपेयर्स के लिए सामान्य से कहीं ज्यादा अलग होने वाला है। सरकार 'न्यू इनकम टैक्स एक्ट' के जरिए देश की कर व्यवस्था में कई बड़े और क्रांतिकारी बदलाव लागू करने जा रही है। इन बदलावों का सीधा असर आपकी टेक-होम सैलरी, टैक्स फाइलिंग के तरीके और निवेश की प्लानिंग पर पड़ेगा। अक्सर लोग लास्ट मोमेंट में टैक्स बचाने की भागदौड़ करते हैं, लेकिन नियमों में हो रहे इन बुनियादी बदलावों को अगर समय रहते नहीं समझा गया, तो आपको न केवल भारी टैक्स चुकाना पड़ सकता है, बल्कि कानूनी पचड़ों का भी सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आइए आपको बताते हैं 1 अप्रैल से क्या क्या बदल रहा है?

Income Tax

क्यों उठाया गया ये कदम?

नए अधिनियम का मुख्य उद्देश्य टैक्स प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और डिजिटल बनाना है। इसमें असेसमेंट ईयर (निर्धारण वर्ष) की परिभाषा से लेकर रिवाइज्ड रिटर्न (संशोधित रिटर्न) दाखिल करने की समय सीमा तक, कई पुराने प्रावधानों को बदला गया है। मिडिल ईस्ट में चल रहे वैश्विक आर्थिक तनाव और बाजार की अस्थिरता के बीच, सरकार का ध्यान घरेलू कर संग्रह को मजबूत करने और कर चोरी को रोकने पर है। शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने वालों के लिए एसटीटी (STT) की दरों में बदलाव और एचआरए (HRA) के नियमों का विस्तार इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। टैक्सपेयर्स के लिए यह समझना अनिवार्य है कि अब 'डिफ़ॉल्ट' टैक्स व्यवस्था क्या होगी और उन्हें पुरानी व्यवस्था चुनने के लिए क्या कदम उठाने होंगे।

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