Indian Mango Imports : नेपाल के कृषि, वन और पर्यावरण मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारतीय आमों के आयात पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। मंत्रालय के अनुसार कुछ मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर यह दावा फैल गया था कि नेपाल ने भारत से आने वाले आमों पर रोक लगा दी है, लेकिन यह जानकारी सही नहीं है। नेपाल के पादप संगरोध एवं कीटनाशक प्रबंधन केंद्र (Plant Quarantine and Pesticide Management Centre - PQPMC) ने इस पूरे मामले पर आधिकारिक बयान जारी किया। यह केंद्र नेपाल का राष्ट्रीय पादप संरक्षण संगठन (NPPO) भी है।
भारतीय आमों के आयात पर प्रतिबंध की खबर पर नेपाल सरकार की सफाई (तस्वीर-istock)
आयात पर कोई रोक नहीं
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक नेपाल सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारतीय आमों के आयात पर किसी तरह की रोक नहीं लगाई गई है। आयात परमिट पहले की तरह जारी किए जा रहे हैं। सरकार ने कहा कि भारत के राष्ट्रीय पादप संरक्षण संगठन द्वारा जारी फाइटोसैनिटरी प्रमाणपत्र के आधार पर ही आमों की खेप को नेपाल में प्रवेश की अनुमति दी जा रही है। यानी अगर सभी नियम पूरे किए जाते हैं, तो व्यापार (Nepal India trade) पहले की तरह जारी रहेगा।
सीमा क्षेत्रों में फैली चिंता
इस मुद्दे को लेकर नेपाल-भारत सीमा के पास स्थित जनकपुरधाम जैसे क्षेत्रों में फल व्यापारियों के बीच चिंता फैल गई थी। शुरुआत में जब कुछ कड़े नियमों की खबर आई, तो व्यापारियों को लगा कि भारतीय आमों की सप्लाई पर रोक लग जाएगी। इससे स्थानीय बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया था, क्योंकि इन क्षेत्रों में आम की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा भारत से आता है।
स्थानीय उत्पादन और आयात की जरूरत
नेपाल में स्थानीय आम भी उगाए जाते हैं और उनकी गुणवत्ता को काफी अच्छा माना जाता है। लेकिन इनकी फसल का मौसम बहुत छोटा होता है, लगभग दो महीने तक ही स्थानीय आम उपलब्ध रहते हैं। इसी वजह से पूरे साल बाजार की मांग को पूरा करने के लिए भारत से आमों का आयात जरूरी माना जाता है। यदि आयात बाधित हो जाए, तो बाजार में कमी और कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना रहती है।
व्यापारियों की चिंता और बाजार की स्थिति
शुरुआती खबरों के बाद व्यापारियों ने चिंता जताई थी कि अगर सख्त नियम या रोक लगती है, तो उनका व्यवसाय प्रभावित होगा। खासकर छोटे व्यापारी, जो सीमा पार व्यापार पर निर्भर हैं, उन्हें नुकसान का डर था। लेकिन सरकार की नई सफाई के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि व्यापार बंद नहीं हुआ है, बल्कि केवल गुणवत्ता और सुरक्षा के मानकों को और सख्त किया गया है।
AgriGoI का मीडिया रिपोर्टों का खंडन
पटना आकाशवाणी समाचार ने एक्स पर लिखा कि AgriGoI ने उन कुछ मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया है, जिनमें दावा किया गया था कि Nepal ने भारत से आमों के आयात पर प्रतिबंध या रोक लगा दी है। मंत्रालय ने कहा कि ये रिपोर्टें तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक हैं। @AgriGoI ने स्पष्ट किया कि हाल ही में Nepal ने आयात से संबंधित कुछ शर्तों में संशोधन किया है, जिनमें हॉट वॉटर ट्रीटमेंट (Hot Water Treatment) की अनिवार्यता भी शामिल है। हालांकि, भारत निर्धारित आवश्यकताओं का पालन करते हुए आमों के निर्यात को सुचारु रूप से जारी रखे हुए है।
असल में क्या हैं नए नियम
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक नेपाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम किसी व्यापारिक रोक के रूप में नहीं लिया गया है, बल्कि यह पूरी तरह से तकनीकी और वैज्ञानिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसका उद्देश्य कृषि उत्पादों को खतरनाक कीटों और बीमारियों से बचाना है। नेपाल ने बताया कि यह निर्णय “पेस्ट रिस्क एनालिसिस (PRA)” यानी कीट जोखिम विश्लेषण के आधार पर लिया गया है। यह विश्लेषण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार किया जाता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आयातित फल और सब्जियां किसी भी हानिकारक कीट या रोग को देश में न लाएं।
फाइटोसैनिटरी उपाय क्या हैं
नेपाल ने कहा है कि भारतीय आमों के लिए केवल फाइटोसैनिटरी (पौध-स्वास्थ्य) उपाय लागू किए गए हैं। इसका मतलब यह है कि आमों को कुछ विशेष प्रक्रियाओं से गुजरना होगा ताकि वे सुरक्षित माने जा सकें। इन नियमों के तहत यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आमों में किसी प्रकार के उच्च जोखिम वाले कीट न हों। इसके अलावा, आमों को एक विशेष गर्म पानी की प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके अनुसार आमों को 48 डिग्री सेल्सियस गर्म पानी में 1 घंटे तक रखा जाएगा। यह प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है और इसका उपयोग फलों में मौजूद लार्वा और हानिकारक सूक्ष्म जीवों को खत्म करने के लिए किया जाता है।
व्यापार जारी, सुरक्षा पर जोर
नेपाल सरकार के बयान से यह साफ हो गया है कि भारत से आमों का आयात जारी रहेगा, बशर्ते सभी फाइटोसैनिटरी मानकों का पालन किया जाए। इसका उद्देश्य व्यापार रोकना नहीं, बल्कि कृषि सुरक्षा को मजबूत करना है। सरकार ने दोनों देशों के बीच चल रहे पारंपरिक व्यापारिक संबंधों को बनाए रखते हुए यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि बाजार में आपूर्ति भी बनी रहे और कृषि सुरक्षा भी प्रभावित न हो।
