Jal Jeevan Mission : केंद्र सरकार ने गुरुवार को संसद में बताया कि जल जीवन मिशन (JJM) के तहत देश के ग्रामीण इलाकों में हर घर तक नल से पानी पहुंचाने का अभियान लगातार आगे बढ़ रहा है। सरकार के मुताबिक, अब देश के 82% से अधिक ग्रामीण परिवारों को उनके घरों में नल के जरिए पीने का पानी मिल रहा है। इस योजना को और मजबूत बनाने के लिए सरकार ने इसका बजट भी काफी बढ़ा दिया है और मिशन की अवधि दिसंबर 2028 तक बढ़ा दी गई है।
जल जीवन मिशन 2.0: देश के 82% से ज्यादा ग्रामीण घरों तक पहुंचा नल का जल, सरकार ने संसद में दी जानकारी (तस्वीर-X)
15.89 करोड़ ग्रामीण परिवारों को मिला नल का जल
लोकसभा में एक सवाल के जवाब में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने बताया कि 18 जुलाई 2026 तक देश के कुल 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से 15.89 करोड़ परिवारों (82.09%) के घरों तक नल से पानी की सुविधा पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर ग्रामीण परिवार को सुरक्षित और नियमित पेयजल उपलब्ध कराना है।
2019 में केवल 16.71% घरों तक थी सुविधा
मंत्री ने बताया कि जब अगस्त 2019 में जल जीवन मिशन की शुरुआत हुई थी, तब केवल 3.23 करोड़ ग्रामीण परिवारों, यानी 16.71 प्रतिशत घरों, में ही नल से पानी की सुविधा उपलब्ध थी। पिछले करीब 7 वर्षों में मिशन के तहत 12.66 करोड़ अतिरिक्त ग्रामीण परिवारों को फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (FHTC) दिए गए हैं। इससे लाखों गांवों में लोगों का जीवन आसान हुआ है और महिलाओं व बच्चों को पानी लाने के लिए लंबी दूरी तय करने की जरूरत भी कम हुई है।
जल जीवन मिशन 2.0 को मिला बड़ा बजट
सरकार ने जल जीवन मिशन को और प्रभावी बनाने के लिए इसका कुल वित्तीय प्रावधान 3.60 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। वहीं, केंद्र सरकार का हिस्सा 2.08 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 3.59 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसमें 1.51 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त केंद्रीय बजट भी शामिल है। सरकार का कहना है कि इस अतिरिक्त धनराशि का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए किया जाएगा।
अब सिर्फ कनेक्शन नहीं, पानी की गुणवत्ता पर भी रहेगा फोकस
सरकार के अनुसार, जल जीवन मिशन 2.0 केवल नए नल कनेक्शन देने तक सीमित नहीं रहेगा। अब मिशन के तहत पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच, जल स्रोतों का संरक्षण, जल उपलब्धता को लंबे समय तक बनाए रखना और गांवों की भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार चाहती है कि आने वाले वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल व्यवस्था पूरी तरह टिकाऊ और भरोसेमंद बने।
सर्वे में सामने आए अच्छे परिणाम
सरकार ने बताया कि वर्ष 2024 में कराए गए एक स्वतंत्र फंक्शनैलिटी असेसमेंट में जल जीवन मिशन के अच्छे नतीजे सामने आए। सर्वे के अनुसार, 98.1 प्रतिशत परिवारों के पास नल का कनेक्शन मौजूद था। इनमें से 87 प्रतिशत परिवारों ने बताया कि उन्हें पिछले सप्ताह नल के जरिए पानी मिला था। वहीं, जांच में 76 प्रतिशत नल कनेक्शन पूरी तरह कार्यशील पाए गए। इसमें पानी की मात्रा, गुणवत्ता और नियमित आपूर्ति जैसे मानकों को शामिल किया गया था।
तकनीक की मदद से होगी बेहतर निगरानी
जल आपूर्ति व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए सरकार कई आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रही है। इसके तहत संपत्तियों की जियो-टैगिंग, थर्ड पार्टी निरीक्षण, आधार आधारित निगरानी, ऑनलाइन वित्तीय प्रबंधन प्रणाली, गांव और जिला स्तर के डैशबोर्ड तथा इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित सेंसर तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन उपायों से पानी की आपूर्ति की वास्तविक समय में निगरानी करना आसान होगा और किसी भी समस्या का जल्दी समाधान किया जा सकेगा।
2028 तक हर घर तक सुरक्षित पानी पहुंचाने का लक्ष्य
केंद्र सरकार का कहना है कि जल जीवन मिशन 2.0 का मुख्य उद्देश्य देश के हर ग्रामीण परिवार तक नल से स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है। इसके साथ ही पानी की गुणवत्ता बनाए रखने, जल स्रोतों को सुरक्षित रखने और गांवों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इन प्रयासों से ग्रामीण भारत में पेयजल व्यवस्था लंबे समय तक मजबूत और टिकाऊ बन सकेगी तथा लोगों के जीवन स्तर में और सुधार आएगा।
