म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेश करने वाले निवेशकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हालांकि, एक कॉमन समस्या देखने को मिल रही है कि कुछ निवेशक अपने नॉमिनी का नाम देना भूल जा रहे हैं। Mutual Fund में निवेश करने से पहले एक फॉर्म भरना होता है। यही प्रक्रिया डीमैट के साथ है। एप्लीकेशन फॉर्म में एक छोटा-सा चेकबॉक्स Nominee के लिए होता है। जिसके भूलने पर नॉमिनी का नाम दर्ज नहीं हो पता है। अगर किसी कारण से आप नहीं होते हैं तो नॉमिनी नहीं जोड़ने पर पैसा लेने के लिए आपके परिवार को मुश्किल कानूनी कागजी कार्रवाई, देरी और कुछ मामलों में, विवादों का सामना करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं कि अगर नॉमिनी नहीं जुड़ा है तो पैसे पाने की प्रक्रिया क्या है?
म्यूचुअल फंड नॉमिनेशन
नॉमिनी जोड़ना क्यों जरूरी है?
SEBI ने अब निवेशकों के लिए यह जरूरी कर दिया है कि वे या तो किसी नॉमिनी को रजिस्टर करें या फिर औपचारिक रूप से इससे बाहर रहने का विकल्प चुनें। हालाँकि यह सिर्फ एक प्रक्रिया लग सकती है, लेकिन असल दुनिया में इसका बहुत बड़ा असर होता है।
बिना नॉमिनी क्या होता है?
एक आम डर यह है कि अगर कोई नॉमिनी न हो, तो निवेश शायद गायब हो जाए या कोई संस्था उस पर कब्जा कर ले। लेकिन यह सच नहीं है। निवेश, मरे हुए निवेशक के नाम पर ही जमा रहता है। हालांकि, असल में उस तक पहुंच पाना मुश्किल हो जाता है। इस पैसे को लेने के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है।
बिना नॉमिनी के ऐसे पा सकते हैं पैसा
- सबसे पहले परिवार को संबंधित म्यूचुअल फंड हाउस (AMC), ब्रोकर या डिपॉजिटरी (CDSL/NSDL) को निवेशक की मृत्यु की सूचना देनी होती है।
- इसके बाद मृतक का मूल मृत्यु प्रमाण पत्र (या प्रमाणित कॉपी) जमा करना अनिवार्य होता है।
- दावेदार को एक विशेष फॉर्म भरना होता है जिसे 'ट्रांसमिशन रिक्वेस्ट फॉर्म' कहते हैं।
- क्लेम करने वाले वारिसों को अपना स्वयं का KYC (PAN, आधार) और बैंक खाते का विवरण (कैंसल्ड चेक के साथ) देना होता है। इसके बाद जांच करने के बाद फंड हाउस पैसे उत्ताराधिकारी के अकाउंट में ट्रांसफर कर देता है।
म्यूचुअल फंड और शेयरों के उत्तराधिकार की कानूनी क्या है?
एक्सपर्ट के अनुसार, वारिसों को वैध कानूनी वारिस के रूप में स्थापित करना होगा। इस प्रक्रिया में आमतौर पर कानूनी वारिस प्रमाण पत्र, उत्तराधिकार प्रमाण पत्र, प्रोबेट या सक्षम न्यायालय से जारी 'लेटर्स ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन' जैसे दस्तावेजों के संयोजन की आवश्यकता होती है, जो मामले की प्रकृति पर निर्भर करता है।” कई मामलों में, संस्थान सभी कानूनी वारिसों से शपथ पत्र और अनापत्ति प्रमाण पत्र भी मांगते हैं। एक बार दस्तावेजों का सत्यापन हो जाने के बाद, प्रतिभूतियां या इकाइयां दावेदार या कानूनी वारिसों के खाते में स्थानांतरित (Transmit) कर दी जाती हैं, जिसके बाद वे इन संपत्तियों पर सामान्य अधिकारों का प्रयोग कर सकते हैं।
