लोन एग्रीमेंट का ‘फाइन प्रिंट’: प्रोसेसिंग फीस और प्रीपेमेंट पेनल्टी के हिडन चार्ज का पूरा सच

Loan Agreements Fine Print: लोन एग्रीमेंट के फाइन प्रिंट में प्रोसेसिंग फीस, प्रीपेमेंट पेनल्टी और अन्य छिपे चार्ज शामिल होते हैं, जो कुल लोन लागत बढ़ाते हैं, इसलिए शर्तें ध्यान से पढ़ना जरूरी है।

Loan Agreements Fine Print : आज के समय में पर्सनल लोन, होम लोन और ऑटो लोन लेना बेहद आसान हो गया है। बैंक और NBFCs (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां) तेज प्रोसेसिंग और कम डॉक्युमेंटेशन का दावा करते हैं। लेकिन असली कहानी लोन एग्रीमेंट के उस हिस्से में छिपी होती है जिसे आमतौर पर लोग नजरअंदाज कर देते हैं ‘फाइन प्रिंट’। इसी हिस्से में प्रोसेसिंग फीस (processing fee) प्रीपेमेंट पेनल्टी और अन्य छिपे हुए चार्ज शामिल होते हैं, जो लोन की वास्तविक लागत को काफी बढ़ा सकते हैं।

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आसान दिखने वाला लोन, लेकिन शर्तें जटिल (तस्वीर-istock)

प्रोसेसिंग फीस

लोन अप्रूव होने से पहले ही बैंक एक प्रोसेसिंग फीस वसूलते हैं। यह आमतौर पर लोन राशि का 0.5% से 3% तक हो सकता है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई व्यक्ति 5 लाख रुपये का पर्सनल लोन लेता है, तो उसे शुरुआत में ही 5,000 से 15,000 रुपये तक प्रोसेसिंग फीस देनी पड़ सकती है। कई बार ग्राहक इस खर्च को छोटे EMI के आकर्षण में नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह राशि सीधे जेब पर असर डालती है क्योंकि यह रिफंडेबल नहीं होती।

प्रीपेमेंट पेनल्टी

लोन लेने वाले कई लोग समय से पहले अपना कर्ज चुकाना चाहते हैं ताकि ब्याज की बचत हो सके। लेकिन कई बैंक और वित्तीय संस्थान प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर पर पेनल्टी लगाते हैं। यह आमतौर पर बचे हुए लोन अमाउंट का 1% से 5% तक हो सकता है। इसका मतलब यह है कि अगर कोई ग्राहक आर्थिक रूप से मजबूत होकर अपना लोन जल्दी बंद करना चाहे, तो उसे अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। हालांकि हाल के वर्षों में कुछ रेगुलेटरी गाइडलाइंस के कारण फ्लोटिंग रेट लोन पर यह पेनल्टी कम या समाप्त भी की गई है, लेकिन कई मामलों में यह अभी भी लागू है।

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