US Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के रूस से तेल खरीदने के कारण आयातित भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगा दिया है। इस कदम से कपड़ा, समुद्री उत्पादों और चमड़ा निर्यात जैसे क्षेत्रों पर बुरा असर पड़ने की संभावना है। इस आदेश के बाद एक छोटी रियायत सूची को छोड़कर, भारतीय वस्तुओं पर कुल शुल्क 50 प्रतिशत हो जाएगा। किन किन सामान पर पड़ेगी मार और किन देशों को होगा फायदा जानिए।
भारतीय उत्पादों पर पड़ेगी टैरिफ की मार (PTI)
इन क्षेत्रों को टैरिफ का खामियाजा भुगतना पड़ेगा
पीटीआई की खबर के मुताबिक, जिन क्षेत्रों को इन टैरिफ का खामियाजा भुगतना पड़ेगा, उनमें कपड़ा/वस्त्र, रत्न व आभूषण, झींगा, चमड़ा और जूते, पशु उत्पाद, रसायन, और विद्युत एवं यांत्रिक मशीनरी शामिल हैं। जिन छूट प्राप्त वस्तुओं पर उच्च टैरिफ लागू नहीं होंगे, उनमें दवाइयां; ऊर्जा उत्पाद जैसे कच्चा तेल, परिष्कृत ईंधन, प्राकृतिक गैस, कोयला और बिजली; महत्वपूर्ण खनिज; और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं अर्धचालकों की एक विस्तृत श्रृंखला, जैसे कंप्यूटर, टैबलेट, स्मार्टफोन, सॉलिड-स्टेट ड्राइव, फ्लैट पैनल डिस्प्ले और इंटीग्रेटेड सर्किट शामिल हैं।
भारत के इन प्रतिद्वंदी देशों को होगा फायदा
नए शुल्क के बाद, भारत के प्रतिस्पर्धियों की स्थिति अमेरिकी बाजार में बेहतर होगी क्योंकि उन पर शुल्क कम होगा - म्यांमार (40 प्रतिशत), थाईलैंड और कंबोडिया (दोनों 36 प्रतिशत), बांग्लादेश (35 प्रतिशत), इंडोनेशिया (32 प्रतिशत), चीन और श्रीलंका (दोनों 30 प्रतिशत), मलेशिया (25 प्रतिशत), फिलीपींस और वियतनाम (दोनों 20 प्रतिशत)। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर छठे दौर की वार्ता के लिए एक अमेरिकी टीम 25 अगस्त से भारत आने वाली है। इसे प्रस्तावित बीटीए में अमेरिका द्वारा की गई मांगों पर नई दिल्ली को सहमत कराने के लिए एक दबाव रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
86 अरब डॉलर के निर्यात पर गंभीर असर पडे़गा
निर्यातकों के अनुसार, इस कदम से अमेरिका को भारत के 86 अरब डॉलर के निर्यात पर गंभीर असर पड़ेगा। भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा, यह बेहद चौंकाने वाला है। इससे अमेरिका को भारत के 55 प्रतिशत निर्यात पर असर पड़ेगा। फियो के अध्यक्ष एस सी रल्हन ने कहा, यह कदम भारतीय निर्यात के लिए एक गंभीर झटका है, क्योंकि अमेरिकी बाजार में हमारे लगभग 55 प्रतिशत सामान सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। कुल 50 प्रतिशत जवाबी शुल्क प्रभावी रूप से कीमत को बहुत बढ़ा देगा। उन्होंने कहा कि इससे भारतीय निर्यातकों को कम जवाबी शुल्क वाले देशों की तुलना में 30-35 प्रतिशत प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान होगा।
रल्हन ने कहा कि कई निर्यात ऑर्डर पहले ही रोक दिए गए हैं, क्योंकि खरीदार अधिक लागत के मद्देनजर अपने फैसले पर फिर से विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मार्जिन पहले से ही कम है और यह अतिरिक्त झटका निर्यातकों को अपने पुराने ग्राहकों को खोने के लिए मजबूर कर सकता है। आर्थिक थिंक टैंक 'ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव' (जीटीआरआई) ने कहा कि अमेरिका के शुल्क से भारतीय सामान वहां काफी महंगे हो सकते हैं, जिससे अमेरिका को होने वाले निर्यात में 40-50 प्रतिशत की कमी आने की आशंका है।
चीन, वियतनाम और बांग्लादेश से भी अधिक टैक्स
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि इस कदम से भारत पर लगाया गया अमेरिकी कर चीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिद्वंद्वियों से कहीं अधिक हो गया है। उन्होंने कहा कि 2024 में चीन ने रूस से 62.6 अरब डॉलर का तेल खरीदा, जो भारत के 52.7 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा है, फिर भी उसे इस तरह का कोई जुर्माना नहीं देना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका, चीन पर निशाना साधने से बचता है क्योंकि चीन गैलियम, जर्मेनियम, रेयर अर्थ और ग्रेफाइट जैसी महत्वपूर्ण सामग्रियों पर अपना दबदबा बनाए हुए है, जो अमेरिकी रक्षा और तकनीक के लिए बेहद जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने यूरोपीय संघ जैसे अपने सहयोगियों के रूस के साथ व्यापार को भी नजरअंदाज किया है। अमेरिका ने खुद रूस से 3.3 अरब डॉलर की सामरिक सामग्री खरीदी है।
