India Gold Demand : भारत में सोने की लगातार बढ़ती कीमतों (Gold Price) और ऊंचे आयात शुल्क के कारण सोने की मांग पर बड़ा असर देखने को मिल रहा है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 (FY26) में देश में सोने की मांग करीब 8 प्रतिशत तक घट सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले वित्त वर्ष 2027 (FY27) तक कुल सोने की मांग 620 से 640 टन के बीच रह सकती है। अगर ऐसा होता है, तो यह कोरोना महामारी के साल 2021 को छोड़कर पिछले 10 वर्षों में सबसे कम स्तर होगा। उधर विश्व स्वर्ण परिषद की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश में वर्ष 2026 के दौरान सोने की मांग में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल आभूषण, सोने की छड़ और सिक्कों की कुल मांग करीब 50 से 60 टन तक कम हो सकती है। यह पिछले साल की तुलना में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट होगी। परिषद का मानना है कि इसका सबसे बड़ा कारण सोने पर आयात शुल्क में की गई भारी बढ़ोतरी है।
सोना हुआ और महंगा, मांग में भारी गिरावट की आहट (तस्वीर-istock)
रिकॉर्ड ऊंची कीमतों ने घटाई ग्राहकों की खरीद क्षमता
रिपोर्ट के मुताबिक, सोने की मांग में गिरावट का सबसे बड़ा कारण इसकी लगातार बढ़ती कीमतें हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी और घरेलू स्तर पर ऊंचे आयात शुल्क के चलते सोना महंगा होता जा रहा है। भारत में सोने की कीमतें अब लगभग 10 ग्राम पर 1,60,000 रुपये के स्तर के आसपास पहुंच रही हैं। इतने ऊंचे दामों के कारण आम उपभोक्ताओं के लिए सोना खरीदना मुश्किल होता जा रहा है। इसका सीधा असर बाजार की मांग पर पड़ रहा है और ग्राहक पहले की तुलना में कम मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं।
महंगा हुआ सोना
शादी और त्योहारों में भी बदला खरीद का तरीका
हालांकि शादी और त्योहारों के सीजन में सोने की मांग पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन लोगों के खरीदने के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। अब ग्राहक नई ज्वेलरी खरीदने के बजाय अपनी पुरानी ज्वेलरी को एक्सचेंज करके नया सोना लेना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इससे ज्वेलर्स के पास नए सोने की बिक्री की मात्रा लगातार कम हो रही है। व्यापारियों का कहना है कि ऊंची कीमतों और 15 प्रतिशत आयात शुल्क के कारण ग्राहकों के पास विकल्प सीमित हो गए हैं, जिससे बाजार में नई खरीदारी धीमी पड़ गई है।
बिक्री की मात्रा घटी, लेकिन रेवेन्यू में बढ़ोतरी
दिलचस्प बात यह है कि सोने की बिक्री वजन के हिसाब से भले ही कम हो रही हो, लेकिन ज्वेलरी कंपनियों की कमाई बढ़ रही है। इसका कारण यह है कि सोने की कीमतें बहुत अधिक हो चुकी हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के करीब 70 बड़े ज्वेलर्स, जो संगठित बाजार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा संभालते हैं, उनकी बिक्री की वैल्यू में तेजी बनी हुई है। अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में ज्वेलरी कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ सकती है, भले ही मात्रा के हिसाब से बिक्री घट रही हो।
सोने की कीमतों में तेजी
उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव, जरूरत पर सीमित खरीदारी
बाजार के जानकारों का कहना है कि भारतीय मध्यम वर्ग के लिए सोना आज भी एक महत्वपूर्ण निवेश और परंपरा का हिस्सा बना हुआ है। हालांकि, बढ़ती कीमतों ने लोगों के खरीदने के तरीके को बदल दिया है। अब उपभोक्ता केवल जरूरी मौकों जैसे शादी या बड़े पारिवारिक कार्यक्रमों में ही सोना खरीद रहे हैं। पहले की तरह अनियंत्रित खरीदारी अब कम हो गई है और लोग बजट के अनुसार ही खर्च कर रहे हैं।
भविष्य में सुधार की उम्मीद
ज्वेलर्स और बाजार एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर आने वाले समय में सोने की कीमतों में स्थिरता आती है, तो बाजार में मांग धीरे-धीरे फिर से बढ़ सकती है। फिलहाल ऊंचे दामों और आयात शुल्क का दबाव बना हुआ है, जिससे बिक्री की मात्रा प्रभावित हो रही है। लेकिन लंबी अवधि में जैसे ही आर्थिक स्थिति संतुलित होगी, नए खरीदारों की वापसी संभव है और सोने के बाजार में सुधार देखने को मिल सकता है।
सरकार ने बढ़ाया आयात शुल्क
सरकार ने सोने पर आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। इसे अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी माना जा रहा है। इससे जुलाई 2024 में दी गई शुल्क राहत पूरी तरह खत्म हो गई है। बढ़े हुए शुल्क का सीधा असर सोने की कीमतों पर पड़ रहा है, जिससे बाजार में खरीदारी कमजोर हो सकती है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी लोगों से एक साल तक सोना खरीदने से बचने की अपील की है ताकि देश का आयात बिल कम किया जा सके।
आभूषण और निवेश मांग पर अलग असर
विश्व स्वर्ण परिषद (WGC) की रिपोर्ट के अनुसार, आयात शुल्क बढ़ने का असर सोने की मांग के अलग-अलग हिस्सों पर अलग तरीके से पड़ता है। निवेश के लिए खरीदे जाने वाले सोने जैसे गोल्ड बार और सिक्कों की मांग शुल्क बढ़ने पर तेजी से घटती है। दूसरी ओर, आभूषणों की मांग पर इसका असर थोड़ा कम होता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में शादी-विवाह और सामाजिक कार्यक्रमों में सोने के आभूषणों की खरीद जरूरी मानी जाती है। इसलिए कीमतें बढ़ने के बावजूद लोग जरूरत के अनुसार आभूषण खरीदते रहते हैं। हालांकि लगातार बढ़ती कीमतें और महंगाई लोगों की खरीद क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं।
महंगाई, आय और मानसून भी अहम
WGC ने बताया कि सिर्फ आयात शुल्क ही नहीं, बल्कि कई अन्य आर्थिक कारण भी सोने की मांग को प्रभावित करते हैं। इनमें लोगों की आय, महंगाई और मानसून जैसी परिस्थितियां शामिल हैं। अगर महंगाई बढ़ती है या ग्रामीण आय कमजोर होती है, तो सोने की खरीद पर असर पड़ता है। रिपोर्ट के मुताबिक, निवेश के तौर पर सोना खरीदने वाले लोग बाजार की स्थिति, आय स्तर और सरकारी नीतियों को ध्यान में रखते हैं। जब शुल्क ज्यादा होता है या नियम सख्त किए जाते हैं, तो निवेश मांग कमजोर पड़ जाती है। वहीं, अच्छा मानसून और बढ़ती आय ग्रामीण इलाकों में सोने की मांग को मजबूत कर सकते हैं।
बढ़ सकता है तस्करी का खतरा
WGC ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि आयात शुल्क बढ़ने के बाद देश में सोने की तस्करी बढ़ने का खतरा रहता है। रिपोर्ट में पिछले कई वर्षों के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि जब-जब सरकार ने शुल्क बढ़ाया, तब-तब अवैध तरीके से सोना लाने के मामले भी बढ़े। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2013 में आयात शुल्क में 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद तस्करी वाला सोना तेजी से बढ़ा था। उस समय पहली तिमाही में करीब 10 टन अवैध सोना देश में आया था, जो 2014 की समान अवधि तक बढ़कर लगभग 70 टन पहुंच गया।
एक बार नेटवर्क बनने पर रोकना मुश्किल
WGC ने कहा कि वर्ष 2013 की दूसरी छमाही से लेकर 2019 की दूसरी तिमाही तक आयात शुल्क 10 प्रतिशत पर स्थिर रहा, लेकिन इसके बावजूद तस्करी का स्तर ऊंचा बना रहा। इस दौरान औसतन हर तिमाही में करीब 34 टन सोना अवैध रूप से देश में आता रहा। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक बार तस्करी का नेटवर्क बन जाए, तो उसे खत्म करना काफी मुश्किल हो जाता है। इसी तरह जुलाई 2022 में जब शुल्क को 10.75 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया गया, तब भी अवैध आयात में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। दूसरी तिमाही में लगभग 17 टन तस्करी वाला सोना आया था, जो उसी साल के अंत तक बढ़कर करीब 50 टन तक पहुंच गया। यह स्थिति 2023 के अधिकांश समय तक बनी रही।
बाजार पर आगे क्या असर पड़ेगा
एक्सपर्ट्स मानना है कि अगर सोने की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और आयात शुल्क में कोई राहत नहीं मिलती, तो आने वाले महीनों में मांग और कमजोर हो सकती है। हालांकि शादी-ब्याह का सीजन और त्योहारों के दौरान कुछ हद तक खरीदारी बनी रहने की उम्मीद है। डब्ल्यूजीसी का कहना है कि सरकार को राजस्व बढ़ाने और व्यापार घाटा कम करने के साथ-साथ तस्करी पर भी नजर रखनी होगी। ज्यादा शुल्क से जहां सरकार को फायदा होता है, वहीं अवैध कारोबार बढ़ने का खतरा भी बढ़ जाता है।
