Stock Market This Week : आने वाले कारोबारी सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार की चाल मुख्य रूप से कंपनियों के तिमाही नतीजों, मुद्रास्फीति (महंगाई) के आंकड़ों, वैश्विक रुझानों और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। इसके अलावा विदेशी निवेशकों (FII) का रुख, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
तिमाही नतीजों, मुद्रास्फीति के आंकड़ों और कच्चे तेल से तय होगी शेयर बाजार की चाल
महंगाई के आंकड़ों और ब्याज दरों का असर
घरेलू मोर्चे पर निवेशकों की नजर सबसे पहले सितंबर महीने के खुदरा (CPI) और थोक (WPI) महंगाई के आंकड़ों पर होगी। यदि खुदरा महंगाई उम्मीद से ज्यादा रहती है, तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा ब्याज दरों में सख्ती बढ़ाने की चिंता फिर से उभर सकती है। इससे बैंकिंग, ऑटो और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, यदि आंकड़े नरम रहते हैं, तो बाजार को राहत मिल सकती है, बशर्ते कच्चा तेल नियंत्रण में रहे। अगर ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है, तो यह राहत अल्पकालिक साबित हो सकती है। थोक महंगाई के आंकड़े यह बताएंगे कि उत्पादकों पर ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स लागत का कितना असर पड़ रहा है।
आईटी सेक्टर और प्रमुख कंपनियों के नतीजे
इस सप्ताह कॉरपोरेट जगत के तिमाही नतीजों पर बाजार की पैनी नजर रहेगी। विशेष तौर पर आईटी क्षेत्र पर फोकस रहेगा क्योंकि विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और टेक महिंद्रा अपने सितंबर तिमाही के वित्तीय परिणाम जारी करने वाली हैं। इनके अलावा बीएचईएल, केनरा बैंक, एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज, एचडीएफसी एएमसी और नेस्ले जैसी बड़ी कंपनियां भी अपने नतीजे घोषित करेंगी। जानकारों का मानना है कि बेहतर होते कॉर्पोरेट आय के रुझान बाजार को संभालने में मदद कर सकते हैं।
बाजार का मौजूदा रुझान और विदेशी निवेशकों की भूमिका
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के शोध प्रमुख (संपत्ति प्रबंधन) सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजारों में सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिल सकता है, क्योंकि बाजार बेहतर होती घरेलू आय के रुझान और बढ़ते वैश्विक जोखिमों के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं। ब्रेंट क्रूड का 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहना और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली धारणा को प्रभावित कर रही है।
उन्होंने कहा कि लगातार आठ सप्ताह की गिरावट के बाद पिछले सप्ताह निफ्टी-50 में 0.4 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जो निचले स्तर पर कुछ स्थिरता का संकेत देती है। पिछले सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 562.63 अंक या 0.78 प्रतिशत चढ़ा था, जबकि एनएसई का निफ्टी 98.5 अंक या 0.43 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ था।
ऑनलाइन ट्रेडिंग फर्म एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पोनमुडी आर ने कहा कि सितंबर तिमाही के नतीजे आने साथ ही कंपनियों के वित्तीय परिणाम स्थानीय स्तर पर प्रदर्शन को तेजी से प्रभावित करेंगे। टीसीएस के नतीजों ने आईटी शेयरों में सुधार को गति दी, जिससे शुक्रवार को व्यापक सूचकांकों को समर्थन मिला।
