Iran vs US war: जानिए ईरान के उन 'भूतिया जहाजों' की कहानी, जो रातों-रात भर रहे हैं उसकी तिजोरी, क्यों बेबस अमेरिका?

दुनिया का सबसे ताकतवर देश अमेरिका जिस पर आर्थिक पाबंदियां (Sanctions) लगा दे, उस देश की कमर टूट जाती है। लेकिन ईरान के मामले में कहानी बिलकुल उलट है। दशकों से कड़े प्रतिबंधों और 'आर्थिक युद्ध' झेलने के बाद भी ईरान न केवल टिका हुआ है, बल्कि अमेरिका से सीधी टक्कर ले रहा है। आखिर कहां से आ रहा है इतना पैसा? क्या है ईरान की उस 'गुप्त कमाई' का राज? आइए, इसे 5 बड़े पॉइंट्स में डिकोड करते हैं।

Iran vs US war: अमेरिका और इजरायल जैसे सुपर पावर से ईरान डट कर मुकाबला कर रहा है। इस युद्ध चलते हुए 37 दिन हो गए हैं लेकिन ईरान हार मारने को तैयार नहीं है। वहीं, दूसरी ओर अमेरिका में महंगाई से लेकर वित्तीय बोझ काफी बढ़ गया है। पेंटागन ने ईरान के साथ जारी तनाव और संभावित युद्ध के लिए 200 अरब डॉलर से अधिक की धनराशि की मांग की है, क्योंकि युद्ध से अमेरिकी खजाने पर भारी दबाव पड़ा है। वहीं, दूसरी ओर ईरान बिना किसी 'शोर-शराबा' और वित्तीय मांगे युद्ध कर रहा है। आखिर, इतने बड़े युद्ध का खर्च ईरान कहां से उठा रहा है? ईरान के पास पैसे का क्या स्रोत है? आइए समझते हैं।

Iran War

ईरान की कमाई

'भूतिया जहाज' से अरबों डॉलर की कमाई

ईरान पर तेल बेचने पर पाबंदी है, लेकिन वह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल भंडार रखने वाला देश है। ईरान ने इससे बचने के लिए 'भूतिया जहाज (Dark Fleet) तैयार किया है। ये ऐसे पुराने तेल टैंकर हैं जो समंदर के बीच में अपनी पहचान (GPS) बंद कर देते हैं। आजकल ये जहाज केवल सिग्नल बंद नहीं करते, बल्कि 'स्पूफिंग' (Spoofing) तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। वे अपने जीपीएस सिग्नल के साथ छेड़छाड़ करते हैं जिससे सैटेलाइट को लगता है कि जहाज फारस की खाड़ी में खड़ा है, जबकि हकीकत में वह तेल की डिलीवरी करने के लिए हजारों मील दूर किसी दूसरे देश के पास होता है।ये जहाज अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अपना तेल दूसरे जहाजों में शिफ्ट कर देते हैं। इसके बाद इस तेल को 'मलेशियाई' या 'ओमानी' तेल बताकर चीन और अन्य एशियाई देशों को बेचा जाता है। अकेले चीन को तेल बेचकर ईरान सालाना अरबों डॉलर कमा रहा है।

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