म्यूचुअल फंड में निवेश किया और ITR में छिपाया? कहीं इसी कारण से तो नहीं अटका है आपका रिफंड

क्या आपने म्यूचुअल फंड में पैसा लगाया या निकाला है, लेकिन ITR में इसका जिक्र नहीं किया? आयकर विभाग का AIS डेटा आपके हर लेन-देन पर नजर रखता है। जानिए कैसे इस गलती से आपका रिफंड अटक सकता है।

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने वाले बहुत से टैक्सपेयर्स को लगता है कि केवल नौकरी से मिलने वाली सैलरी या बिजनेस की कमाई की जानकारी देना ही काफी है। इसी वजह से कई लोग म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में किए गए निवेश, एसआईपी (SIP) या म्यूचुअल फंड यूनिट्स को बेचने से हुए मुनाफे या घाटे की जानकारी रिटर्न में दर्ज करना भूल जाते हैं या जानबूझकर छिपा लेते हैं। अगर आपका भी टैक्स रिफंड अभी तक बैंक खाते में नहीं आया है, तो इसकी एक बड़ी वजह म्यूचुअल फंड के लेन-देन को आईटीआर में रिपोर्ट न करना हो सकती है।

ITR Refund

कहीं इसी कारण से तो नहीं अटका है आपका रिफंड

इनकम टैक्स विभाग रखता है सारी जानकारी

आज के डिजिटल दौर में आयकर विभाग के पास आपके हर बड़े वित्तीय लेन-देन का पूरा ब्योरा पहले से मौजूद होता है। जब भी आप म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, रिडीम (पैसा निकालते) करते हैं या स्विच करते हैं, तो फंड हाउस (AMC) इस जानकारी को टैक्स विभाग के साथ साझा करते हैं। यह सारा डेटा आपके एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और फॉर्म 26AS में अपने आप दिखने लगता है। जब टैक्सपेयर अपने आईटीआर में म्यूचुअल फंड के आंकड़ों को दर्ज नहीं करता है, तो सिस्टम में डेटा मिसमैच (Data Mismatch) की स्थिति पैदा हो जाती है।

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