Retail Inflation : देश में आने वाले समय में महंगाई बढ़ने की आशंका जताई गई है। आईसीआईसीआई ग्लोबल मार्केट्स की एक रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत की खुदरा महंगाई (रिटेल इंफ्लेशन) बढ़कर 5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य पदार्थों (food inflation) और ऊर्जा (पेट्रोल-डीजल-गैस) की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी इसकी मुख्य वजह होगी। हालांकि कोर महंगाई करीब 4.5 प्रतिशत के आसपास स्थिर रहने की संभावना है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संभावित एल नीनो (El Nino) के प्रभाव पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा, क्योंकि इसका असर मानसून और कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है।
ईंधन कीमतों से बढ़ेगा महंगाई का दबाव (तस्वीर-istock)
अप्रैल में बढ़ी खुदरा महंगाई
रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही में खुदरा महंगाई औसतन 3.1 प्रतिशत थी, जो अप्रैल 2026 में बढ़कर 3.48 प्रतिशत सालाना आधार (YoY) पर पहुंच गई। इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह खाद्य महंगाई रही। अप्रैल में खाद्य महंगाई बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो गई, जबकि पिछली तिमाही में यह 3.2 प्रतिशत थी। दूसरी ओर, कोर महंगाई करीब स्थिर रही और 3.7 प्रतिशत के स्तर पर बनी रही।
थोक महंगाई तीन साल के उच्च स्तर पर
खुदरा महंगाई के साथ-साथ थोक महंगाई (WPI) में भी तेज उछाल देखा गया है। अप्रैल 2026 में थोक महंगाई बढ़कर 8.3 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो पिछले तीन वर्षों से अधिक समय का सबसे ऊंचा स्तर है। जनवरी-मार्च तिमाही में यह औसतन 2.6 प्रतिशत थी। रिपोर्ट के अनुसार थोक महंगाई में यह तेजी मुख्य रूप से ईंधन और विनिर्मित (मैन्युफैक्चर्ड) उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण आई है।
खाने-पीने की कई चीजें हो सकती हैं महंगी
रिपोर्ट में कहा गया है कि मांस, मछली, समुद्री खाद्य पदार्थ, फल, खाद्य तेल और तैयार खाद्य उत्पादों जैसी कई श्रेणियों में कीमतें बढ़ रही हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा, खाद्य वस्तुओं और उर्वरकों (फर्टिलाइजर) की कीमतें भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इसका असर भारत के घरेलू बाजार पर भी पड़ सकता है। खासकर खाद्य तेल और दालों जैसी वस्तुओं की कीमतों में आगे और बढ़ोतरी होने की संभावना जताई गई है।
गर्मी और मौसम का भी दिख सकता है असर
रिपोर्ट के अनुसार उत्तर और मध्य भारत में पड़ रही भीषण गर्मी तथा अत्यधिक तापमान का असर फलों और सब्जियों जैसी जल्दी खराब होने वाली वस्तुओं पर पड़ सकता है। इससे आने वाले महीनों में इनकी कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौसम संबंधी चुनौतियां खाद्य आपूर्ति को प्रभावित कर सकती हैं, जिससे महंगाई पर अतिरिक्त दबाव बनेगा।
सरकार के पास खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाए जाने के कारण गेहूं की खरीद मजबूत रही है। इससे सरकारी गेहूं खरीद चार साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई। मार्च 2026 के अंत तक सरकारी खाद्यान्न भंडार बफर स्टॉक की जरूरत से तीन गुना अधिक था। इसी वजह से सरकार ने 52 लाख टन चावल को एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के लिए आवंटित किया है और गेहूं निर्यात पर लगी कुछ पाबंदियों में भी ढील दी है।
एल नीनो और कमजोर मानसून सबसे बड़ा खतरा
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आगामी खरीफ सीजन के दौरान एल नीनो की संभावना कृषि क्षेत्र के लिए बड़ा जोखिम बन सकती है। यदि मानसून सामान्य से कमजोर रहता है तो फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है। उत्तर-पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत के कई प्रमुख कृषि क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका जताई गई है। देश के कुल कृषि उत्पादन क करीब 40 प्रतिशत हिस्सा मानसून पर निर्भर क्षेत्रों से आता है। अगर बारिश कम हुई और जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं रहा, तो दालें, मोटे अनाज, तिलहन और मसालों जैसी वर्षा आधारित फसलें प्रभावित हो सकती हैं। इससे खाद्य उत्पादन घटेगा और महंगाई में और तेजी आ सकती है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल देश में खाद्यान्न की स्थिति मजबूत है, लेकिन मौसम और वैश्विक बाजारों में कीमतों की दिशा आने वाले समय में महंगाई को प्रभावित करेगी। ऐसे में सरकार और नीति निर्माताओं को खाद्य कीमतों तथा मानसून की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखनी होगी।
