Direct Tax Collection: चालू वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार को प्रत्यक्ष करों से अच्छी आमदनी हो रही है। आयकर विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 10 फरवरी 2026 तक देश का शुद्ध प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) संग्रह 9.4 प्रतिशत बढ़कर करीब 19.44 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से कॉरपोरेट कर की बेहतर वसूली और कर रिफंड की धीमी रफ्तार के कारण हुई है। आसान शब्दों में कहें तो कंपनियों से ज्यादा टैक्स मिला और टैक्स रिफंड कम जारी किए गए, जिससे कुल संग्रह बढ़ा हुआ दिखाई दे रहा है।
डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में बढ़ोतरी (तस्वीर-istock)
कॉरपोरेट टैक्स में मजबूत बढ़ोतरी
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक आंकड़ों के अनुसार, शुद्ध कॉरपोरेट कर संग्रह में 14.51 प्रतिशत की अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह बढ़कर 8.90 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। कॉरपोरेट कर वह टैक्स होता है जो कंपनियां अपने मुनाफे पर सरकार को देती हैं। कंपनियों के बेहतर मुनाफे और सख्त कर निगरानी के कारण सरकार को इस मद में ज्यादा राजस्व मिला है। कॉरपोरेट टैक्स में यह बढ़त कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रही है।
व्यक्तिगत इनकम टैक्स संग्रह में भी इजाफा
गैर-कॉरपोरेट कर संग्रह, जिसमें व्यक्तिगत आयकर और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) से मिलने वाला कर शामिल है, 5.91 प्रतिशत बढ़कर लगभग 10.03 लाख करोड़ रुपये हो गया है। हालांकि इसकी वृद्धि दर कॉरपोरेट कर की तुलना में कम रही, फिर भी इसमें स्थिर बढ़ोतरी देखने को मिली है। इससे साफ है कि वेतनभोगी और अन्य करदाता वर्ग से भी सरकार को नियमित रूप से कर प्राप्त हो रहा है।
एसटीटी संग्रह लगभग स्थिर
शेयर बाजार में लेनदेन पर लगाया जाने वाला प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) भी सरकार की आय का एक स्रोत है। एक अप्रैल 2025 से 10 फरवरी 2026 के बीच एसटीटी के रूप में 50,279 करोड़ रुपये का संग्रह हुआ। यह रकम पिछले साल की समान अवधि के लगभग बराबर है। इसका मतलब है कि शेयर बाजार में गतिविधियां स्थिर रहीं और इस मद में कोई बड़ी बढ़ोतरी या गिरावट नहीं देखी गई।
रिफंड में कमी से बढ़ा शुद्ध संग्रह
इस अवधि में कर रिफंड जारी करने की रफ्तार धीमी रही है। आंकड़ों के मुताबिक, रिफंड में 18.82 प्रतिशत की गिरावट आई है और यह घटकर 3.34 लाख करोड़ रुपये रह गया है। जब सरकार कम रिफंड जारी करती है, तो शुद्ध कर संग्रह ज्यादा दिखाई देता है। यही कारण है कि कुल शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह की वृद्धि दर को रिफंड में कमी से सहारा मिला है।
सकल टैक्स संग्रह का हाल
अगर सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह की बात करें, यानी रिफंड घटाने से पहले की कुल वसूली, तो इसमें 4.09 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़कर 22.78 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसमें 10.88 लाख करोड़ रुपये का सकल कॉरपोरेट कर और 11.39 लाख करोड़ रुपये का सकल गैर-कॉरपोरेट कर शामिल है। यह आंकड़े बताते हैं कि सरकार की कुल कर वसूली की स्थिति संतुलित और सकारात्मक बनी हुई है।
सरकार का वार्षिक लक्ष्य
सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान (RE) में कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह 24.84 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया है। 10 फरवरी तक के आंकड़ों को देखें तो सरकार अपने लक्ष्य की ओर मजबूत कदमों से बढ़ रही है। आने वाले महीनों में अगर यही रफ्तार बनी रही, तो तय लक्ष्य हासिल करना संभव नजर आता है। कुल मिलाकर, कॉरपोरेट कर में मजबूत बढ़ोतरी और रिफंड में कमी के चलते इस वित्त वर्ष में प्रत्यक्ष कर संग्रह में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है, जो सरकार की वित्तीय स्थिति को मजबूती प्रदान कर रही है।
