India US Trade Deal : भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौते का पहला चरण पूरी तरह से तय हो गया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जानकारी दी कि इस समझौते के दस्तावेज वर्तमान में अंतिम कानूनी ड्राफ्टिंग की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। सरकार की योजना इसे जल्द से जल्द अंतिम रूप देकर लागू करने की है, ताकि प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में भारतीय उद्योगों को व्यापारिक बढ़त हासिल हो सके। दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का पहला खाका तैयार है और इसे जल्द ही क्रियान्वित किया जाएगा।
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बड़े मुद्दों पर बनी सहमति, अमेरिका ने जताई जल्द समझौते की उम्मीद
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी इस प्रगति की पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों देश एक व्यापक व्यापार समझौते के बेहद करीब हैं। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो की आगामी भारत यात्रा से ठीक पहले आया यह बयान दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दिल्ली में आयोजित 'ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम' में सर्जियो गोर ने कहा कि समझौते का बड़ा ढांचा और मुख्य मुद्दे तय हो चुके हैं, जबकि कुछ छोटे-मोटे विषयों पर बातचीत जारी है। उन्होंने स्वीकार किया कि दोनों विशाल अर्थव्यवस्थाओं, 1.4 अरब की आबादी और विविध उत्पादों व क्षेत्रों की जटिलताओं के कारण इसमें समय लगा है, लेकिन अब वार्ता अंतिम मुकाम पर है।
टैरिफ दरें और बाजार तक पहुंच प्राथमिकता
दोनों देशों के प्रतिनिधि पिछले डेढ़ साल से इस व्यापार समझौते पर लगातार काम कर रहे हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर और पीयूष गोयल के बीच कई दौर की बातचीत हुई है, जिसमें व्यक्तिगत उत्पादों और टैरिफ प्रतिशत के स्तर तक जाकर गहन चर्चा की गई है। भारत के व्यापार सचिव ने बताया कि वार्ता के दौरान सामने आई रुकावटों को अब काफी हद तक सुलझा लिया गया है। भारत इस समझौते के जरिए अमेरिकी बाजार में तरजीही पहुंच (Preferential Market Access) और अधिक स्थिर टैरिफ व्यवस्था की मांग कर रहा है।
यूरोपीय संघ के साथ भी एफटीए पर बड़ा अपडेट
इसके साथ ही वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने यूरोपीय संघ (EU) के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर भी बड़ी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस समझौते पर आगामी दिसंबर में हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसके बाद, यह ऐतिहासिक व्यापार समझौता अगले साल फरवरी या मार्च से पूर्ण रूप से प्रभावी हो जाएगा। इन अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों के लागू होने से भारतीय निर्यात, मैन्युफैक्चरिंग और वैश्विक आपूर्ति सीरीज में भारत की भूमिका को एक नई मजबूती मिलेगी।
