Indian Stock Market vs Global Markets: भारतीय शेयर बाजार के लिए 2026 का साल अब तक मुश्किल साबित हुआ है। सोमवार, 28 सितंबर को लगातार 7वें सप्ताह कमजोरी के बीच Nifty करीब 1.56% टूटकर 22,780.25 पर और Sensex 1.52% गिरकर 72,771.72 पर बंद हुआ। दोनों इंडेक्स करीब 6 महीने के निचले स्तरों के आसपास पहुंच गए।
पाकिस्तान से पिछड़ गया भारत
लेकिन कहानी सिर्फ 2026 की नहीं है। पिछले करीब दो साल के पॉइंट टू पॉइंट (Point-to-Point) कंपरेजन में Nifty और Sensex का प्रदर्शन कई बड़े ग्लोबल मार्केट के मुकाबले काफी कमजोर दिखता है। इसी अवधि में साउथ कोरिया का का KOSPI, जापान का Nikkei, अमेरिका का Nasdaq और यहां तक कि पाकिस्तान का KSE-100 भी भारतीय बेंचमार्क से कहीं ज्यादा बढ़े हैं।
2 साल में Nifty और Sensex का क्या हुआ?
28 सितंबर के कारोबार के दौरान Nifty 50 करीब 26,179 से 22,807 तक फिसल चुका था। यानी दो साल के टाइमफ्रेम पर करीब 12.9% की गिरावट आई। इसी तरह Sensex भी करीब 85,571 से 73,734 तक नीचे आया, यानी लगभग 13.8% की गिरावट आई। हालांकि पूरे बाजार को एक ही तस्वीर मानना सही नहीं होगा। इसी अवधि में Bank Nifty करीब 2.9% ऊपर रहा। यानी कमजोरी मुख्य बेंचमार्क इंडेक्स और खासकर उनके बड़े कंस्टीटुएंट्स में ज्यादा दिखाई दी है।
KOSPI ने 160% रिटर्न दिया
भारत के मुकाबले दूसरे बाजारों का प्रदर्शन इस तस्वीर को और दिलचस्प बनाता है। दक्षिण कोरिया के KOSPI ने इस दौरान करीब 2,650 के स्तर से बढ़कर 6,890 तक की छलांग लगाई। इस तरह यह इंडेक्स करीब 160% की तेजी के साथ 28 सितंबर को 6,889.74 पर बंद हुआ था। इसी तरह
Japan का Nikkei 225 करीब 39,829 से बढ़कर 67,034 तक पहुंचा। इस हिसाब से दो साल में करीब 68% की बढ़त हुई। वहीं, अमेरिका के Nasdaq ने भी इसी दौरान करीब 18,120 से 27,068 तक की तेजी दिखाई, जो लगभग 106% की ग्रोथ दिखाती है। S&P 500 भी इस तुलना में करीब 35% ऊपर रहा। यानी एक तरफ भारतीय बेंचमार्क जहां, दो साल की अवधि में नेगेटिव जोन में में हैं, वहीं कई बड़े ग्लोबल इंडेक्स्ट ने 100 फीसदी से ऊपर रिटर्न दिया है।
Pakistan का KSE-100 भी हमसे ज्यादा चढ़ा
सबसे चौंकाने वाले आंकड़े Pakistan के KSE-100 के हैं। दो साल के कंपरेजन में इस इंडेक्स ने करीब 81,000 से 1,70,000 के बीच का सफर तय किया है, जो 110% की तेजी दिखाता है। सितंबर में KSE-100 पहली बार 1,70,000 के ऊपर गया था और 19 सितंबर को 1,70,884.59 पर बंद हुआ। हालांकि, यह बात अलग है कि पाकिस्तान के बेंचमार्क की भारत के Nifty सेंसेक्स से तुलना नहीं की जा सकती है। लेकिन, ग्रोथ के नजरिये से भारत निश्चित रूप से पिछड़ा है।
आखिर भारत के शेयर बाजार पर दबाव क्यों?
भारत के कमजोर प्रदर्शन के पीछे इस समय कई ग्लोबल और डोमेस्टिक फैक्टर एक साथ काम कर रहे हैं। सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल (Crude Oil) से आया है। इसके अलावा US bond yields और डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी बड़ी वजह हैं। इसके अलावा भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेश का बाहर जाना भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार और डेट (Debt) मार्केट से करीब $26 अरब डॉलर की विदेशी पूंजी निकल चुकी है।
Pakistan के KSE-100 में क्या बदला?
Pakistan के मार्केट में तेजी को लेकर मार्केट एनालिस्ट इकोनॉमिक स्थिरता और मॉनेटरी कंडीशन में बदलाव को प्रमुख कारणों में गिना है। IMF प्रोग्राम के तहत करीब $7 अरब के फाइनेंस सपोर्ट और इसके बाद मॉनेटरी टाइटनिंग में राहत को KSE-100 की रैली से जोड़ा है। लेकिन यहां भी रिटर्न कंपरेजन को सीधे इकोनॉमिक स्ट्रेंथ मानना ठीक नहीं होगा।
