India-China Relations: भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और चीन के रिश्तों को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि भारत चीन के साथ अपने द्विपक्षीय और आर्थिक संबंधों को एक बार फिर से पटरी पर लाने और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरी प्रक्रिया और यात्रा का अंतिम पड़ाव या नतीजा क्या होगा, यह अभी तय होना बाकी है। 'ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम' में बोलते हुए पीयूष गोयल ने भारत की व्यापारिक नीति और वैश्विक साझेदारियों पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के किसी भी देश के साथ काम करने और संयुक्त उद्यम (Joint Ventures) स्थापित करने के लिए तैयार है, बशर्ते भारत को उचित और बराबरी की शर्तों पर समझौता मिले। इसके अलावा, देशों के बीच आपसी संपर्क, सहयोग में निरंतरता और भू-राजनीतिक स्थिरता का होना भी बेहद जरूरी है।
चीन संग सुधरेंगे रिश्ते! पीयूष गोयल बोले—'फेयर डील पर दुनिया के साथ काम करने को तैयार भारत' (तस्वीर-x)
चीन के साथ व्यापारिक रिश्ते और भारत की चिंताएं
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक पीयूष गोयल की यह टिप्पणी बेहद खास मानी जा रही है क्योंकि चीन, भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच व्यापार का दायरा लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार 7.9 प्रतिशत बढ़कर 127.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो कि इससे पिछले वर्ष (2024-25) में 118.39 अरब डॉलर था। इस दौरान भारत द्वारा चीन को किए जाने वाले निर्यात में भारी उछाल देखा गया। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का निर्यात 36.62 प्रतिशत बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया, जो पहले 14.25 अरब डॉलर था। हालांकि, दूसरी ओर चीन से भारत में होने वाला आयात भी 16 प्रतिशत बढ़कर 131.62 अरब डॉलर पर पहुंच गया। आयात में इस बढ़ोतरी के कारण भारत का व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़कर 99.19 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले वर्ष 85 अरब डॉलर था। यह बढ़ता व्यापार घाटा भारत के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। इसके अतिरिक्त, सुरक्षा कारणों से भारत ने चीन जैसे पड़ोसी देशों से आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों को भी काफी सख्त कर दिया है। यह ध्यान देने योग्य है कि व्यापारिक और कूटनीतिक सुधार की इस पहल के बीच, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 12 सितंबर 2026 को 'ब्रिक्स शिखर सम्मेलन' के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात भी की थी।
कोविड महामारी का दौर और 'आत्मनिर्भर भारत' का संकल्प
मौजूदा दौर की वैश्विक और भू-राजनीतिक चुनौतियों पर बात करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि आज हर देश यह समझ चुका है कि भरोसेमंद और मित्र देशों का होना कितना जरूरी है। आने वाले समय में यह पहलू सबसे अधिक महत्वपूर्ण साबित होगा। कोविड-19 महामारी के बुरे दौर को याद करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संकट के उस समय में कई विकसित देशों ने भारत को जरूरी सामान, दवाइयां और टीके देने से साफ इनकार कर दिया था। भारत ने महामारी के दौरान 100 से अधिक देशों को भोजन सामग्री और टीके भेजकर मदद की थी, लेकिन जब भारत को जरूरत पड़ी, तो अधिकतर देशों ने भारत को पूरी तरह निराश किया।
उन्होंने फाइजर और मॉडर्ना जैसी वैश्विक वैक्सीन कंपनियों का उदाहरण देते हुए बताया कि जब भारत को टीकों की सख्त जरूरत थी, तब पश्चिमी देशों ने उन्हें देने से मना कर दिया। वे भारत में अपने टीके लाने के लिए आवेदन करने तक को तैयार नहीं थे, जबकि भारत सरकार उन्हें हर तरह की शर्तों में छूट देने के लिए तैयार थी।
गोयल ने कहा कि इस दर्दनाक अनुभव ने भारत को यह अहसास कराया कि आपूर्ति सीरीज (Supply Chain) टूटने पर 1.4 अरब की आबादी वाले देश को कितनी बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इसी कड़वे अनुभव के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'आत्मनिर्भर भारत' का ऐतिहासिक आह्वान किया, ताकि देश हर क्षेत्र में अपनी जरूरतों के लिए खुद पर निर्भर हो सके।
भारत और सिंगापुर के बीच सेमीकंडक्टर क्षेत्र में नई साझेदारी
इसी कार्यक्रम में मौजूद सिंगापुर के उप प्रधानमंत्री और ऊर्जा, व्यापार एवं उद्योग मंत्री गान किम योंग ने भी भारत के साथ अपने संबंधों पर बात की। उन्होंने घोषणा की कि सिंगापुर, भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग को मजबूत करने और इसे आगे बढ़ाने के लिए लगातार बातचीत कर रहा है।
सिंगापुर के मंत्री ने कहा कि वे सेमीकंडक्टर क्षेत्र के तेजी से विकास के लिए भारतीय कार्यबल (Workforce) को विशेष प्रशिक्षण देने और उनके कौशल विकास पर मिलकर काम कर रहे हैं। गौरतलब है कि भारत और सिंगापुर के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता वर्ष 2005 से ही लागू है और दोनों देश अब तकनीक एवं आधुनिक उद्योगों के क्षेत्र में एक-दूसरे का सहयोग बढ़ा रहे हैं।
