अगर न मिलती सब्सिडी तो 1,600 रुपये का होता एक सिलेंडर, सरकार ने संसद में खोला राज

केंद्र सरकार ने संसद में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की असली कीमतों और उस पर दी जा रही सब्सिडी को लेकर बड़ा खुलासा किया है। सरकार के मुताबिक, अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस की कीमतों के बीच सब्सिडी का सुरक्षा कवच न होता, तो आम जनता को रसोई गैस का एक सिलेंडर लगभग 1,600 रुपये से अधिक में मिलता।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में होने वाले भारी उतार-चढ़ाव का असर सीधे आम आदमी की रसोई के बजट पर पड़ता है। घरेलू रसोई गैस (LPG) की बढ़ती कीमतों को लेकर अक्सर उठने वाले सवालों के बीच केंद्र सरकार ने संसद में एक बड़ा खुलासा किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि केंद्र सरकार की ओर से दी जाने वाली भारी सब्सिडी और सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा झेला जाने वाला वित्तीय घाटा न होता, तो भारत में बिना सब्सिडी वाला घरेलू एलपीजी सिलेंडर 1,600 रुपये से लेकर 1,695 रुपये तक की रिकॉर्ड ऊंचाई पर बिक रहा होता। संसद में दिए गए इस आधिकारिक बयान से यह साफ हो गया है कि वैश्विक ऊर्जा संकट के बावजूद सरकार आम उपभोक्ताओं को महंगे ईंधन की मार से बचाने के लिए किस तरह सब्सिडी का सहारा दे रही है।

LPG Price

अगर न मिलती सब्सिडी तो 1,600 रुपये का होता एक सिलेंडर, सरकार ने संसद में खोला राज

तेजी से बढ़ी कीमतें

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सऊदी अरामको (Saudi Aramco) की एलपीजी दरों और वैश्विक आयात लागत (Import Parity Price) के आधार पर एलपीजी सिलेंडरों की वास्तविक लागत काफी अधिक बैठती है। वैश्विक बाजार में भू-राजनीतिक तनावों और आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधानों के कारण गैस उत्पादन और परिवहन लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई थी। यदि इन वैश्विक कीमतों का पूरा भार सीधे घरेलू उपभोक्ताओं पर डाल दिया जाता, तो एक सामान्य 14.2 किलोग्राम वाले इंडेन (Indane), भारत गैस (Bharat Gas) या एचपी गैस (HP Gas) के सिलेंडर की कीमत आम नागरिक की पहुंच से काफी बाहर हो जाती। सरकार ने संसद में बताया कि बाजार दरों और खुदरा बिक्री मूल्य के बीच के इस भारी अंतर को पाटने के लिए सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने वित्तीय दबाव खुद सहन किया है।

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