ITR Form Selection : इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते समय सबसे बड़ी उलझन यह होती है कि कौन सा फॉर्म चुना जाए। इनकम टैक्स कानून के तहत कमाई को मुख्य रूप से 5 हिस्सों (Salary, House Property, Capital Gains, Business/Profession, Other Sources) में बांटा गया है। सही ITR फॉर्म चुनने के लिए आपकी कुल कमाई, आय का स्रोत और आपकी रेजिडेंशियल स्थिति अहम भूमिका निभाती है। आइए जानते हैं कि कौन से फॉर्म में आपकी कौन सी कमाई दर्ज होगी।
ITR फॉर्म का चयन: सही फॉर्म चुनने के लिए समझें अपनी कमाई के स्रोत
सैलरी से होने वाली आय
अगर आपकी कमाई (Salary Income) का मुख्य जरिया सैलरी, बोनस, पेंशन या अलाउंस है और आपका नियोक्ता (कंपनी) से सीधा संबंध है, तो आप सैलरी इनकम टैक्स कैटेगरी में आते हैं। अगर आप निवासी (Resident) हैं, सैलरी कमाते हैं, दो मकानों से किराया आता है और अन्य जरियों से सीमित कमाई है, तो आप ITR-1 (सहज) चुन सकते हैं। इसके लिए शर्त यह है कि आपकी कुल सालाना कमाई 50 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। अगर आपकी सैलरी के साथ बिजनेस या प्रोफेशन की कमाई भी जुड़ी है, तो आपको ITR-3 या ITR-4 भरना होगा।
मकान या प्रॉपर्टी से किराया
मकान या जमीन से मिलने वाला किराया (House Property Income) इस कैटेगरी में आता है। AY 2026-27 से टैक्सपेयर्स के लिए एक बड़ा बदलाव किया गया है। अब आप अधिकतम दो मकानों की संपत्ति से होने वाली आय को ITR-1 में दर्ज कर सकते हैं, जबकि पहले केवल एक ही मकान की अनुमति थी। लेकिन अगर आपके पास दो से ज्यादा प्रॉपर्टी हैं या आपको मकान से हुआ घाटा आगे के सालों के लिए कैरी-फॉरवर्ड करना है, तो आपको ITR-2 चुनना होगा। अगर प्रॉपर्टी से किराए के साथ-साथ बिजनेस से भी कमाई है, तो ITR-3 लागू होगा।
शेयर, म्यूचुअल फंड और संपत्ति की बिक्री
शेयर, म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी या गोल्ड बेचने से जो मुनाफा होता है, उसे कैपिटल गेन्स (Capital Gains) कहते हैं। ITR-1 और ITR-4 में केवल धारा 112A के तहत 1.25 लाख रुपये तक के कुछ सीमित लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) दिखाने की छूट है। अगर इससे ज्यादा का मुनाफा है, शेयर मार्केट में इंट्राडे/F&O ट्रेडिंग करते हैं या अन्य प्रकार के शॉर्ट/लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स हैं, तो बिना बिजनेस इनकम वालों को ITR-2 और बिजनेस/ट्रेडिंग करने वालों को ITR-3 फाइल करना होगा।
बिजनेस, फ्रीलांसिंग और प्रोफेशन से कमाई
फ्रीलांसिंग, कंसल्टेंसी, खुद का बिजनेस, ट्रेडिंग या पार्टनरशिप (PGBP)फर्म से मिलने वाली सैलरी/कमिशन 'बिजनेस और प्रोफेशन' की श्रेणी में आता है। अगर आपकी ऐसी कोई भी कमाई है, तो सामान्य तौर पर आपके लिए ITR-3 लागू होता है। हालांकि, छोटे व्यापारी और प्रोफेशनल्स जो अनुमानित कर योजना (Presumptive Taxation Scheme - धारा 44AD, 44ADA, 44AE) चुनते हैं, वे अपनी सुविधा के लिए ITR-4 (सुगम) फाइल कर सकते हैं, बशर्ते उनकी कुल आय 50 लाख रुपये से कम हो।
कैसे तय करें अपना सही ITR फॉर्म?
ITR का चुनाव सिर्फ किसी एक कमाई को देखकर नहीं, बल्कि आपकी कुल इनकम प्रोफाइल के आधार पर होता है:-
- ITR-1 (सहज): सैलरी, 2 मकानों की प्रॉपर्टी और ब्याज मिलाकर कुल आय 50 लाख रुपये तक हो।
- ITR-2: कैपिटल गेन्स, विदेशी संपत्ति, 2 से अधिक प्रॉपर्टी या 50 लाख रुपये से अधिक आय हो (बिजनेस आय न हो)।
- ITR-3: बिजनेस, प्रोफेशन, फ्रीलांसिंग, F&O ट्रेडिंग या फर्म में पार्टनरशिप से कमाई हो।
- ITR-4 (सुगम): धारा 44AD/44ADA के तहत अनुमानित बिजनेस/प्रोफेशनल आय हो (कुल आय 50 लाख रुपये तक)।
अन्य स्रोतों से होने वाली आय
बैंक ब्याज, डिविडेंड, फैमिली पेंशन, लॉटरी या जुए में जीती गई रकम इस कैटेगरी में आती है। साधारण बैंक ब्याज या डिविडेंड को ITR-1 या ITR-4 में दिखाया जा सकता है। लेकिन अगर आपकी कमाई में लॉटरी, हॉर्स रेस या सट्टेबाजी जैसी विशेष दरों वाली आय शामिल है, तो आपको ITR-2 (बिना बिजनेस इनकम) या ITR-3 (बिजनेस इनकम के साथ) का चयन करना होगा।
