ITR filing: यदि आप खुद अपना टैक्स रिटर्न दाखिल करने की योजना बना रहे हैं, तो टैक्स के नियमों की बारीकियों को जरूर समझ लें। साथ ही आपको मिल मिलने वाली सभी कटौतियों और छूटों के बारे में भी पता होना चाहिए। कई बार स्वंय टैक्स दाखिल करने वाले अपने रिटर्न में गलतियां करते हैं, जिसके कारण उन्हें कर विभाग से नोटिस मिलता है। ऐसे में हम यहां ज्यादातर होने वाली 8 गलतियों के बारे में बता रहे हैं जो लोग अक्सर करते हैं जिन्हें यदि आप जान लेंगे तो हो सकता है कि आप इससे बच जाएं।
टैक्स रिटर्न
गलती नंबर-1
फॉर्म 26AS और AIS का सत्यापन नहीं करना
टैक्स पोर्टल पर अपना फॉर्म 26AS और वार्षिक सूचना विवरण (एआईएस) जांचें। सुनिश्चित करें कि सभी आय, टीडीएस और टीसीएस भुगतान का उल्लेख किया गया है।
गलती नंबर-2
'अन्य आय' को शामिल न करने की भूल
टैक्स रिटर्न फाइल करते समय स्टॉक और फंड पर ब्याज, डिविडेंड्स और कैपिटल गेन से आय को रिपोर्ट करना न भूलें। ये आय एआईएस में उल्लिखित होती हैं, इसलिए वे कर विभाग से छिपी नहीं रहेंगी।
गलती नंबर-3
पूंजीगत लाभ और हानि को शामिल नहीं करना
आपके पूंजीगत लाभ की गणना के लिए भारी कागजी कार्रवाई की कोई जरूरत नहीं है। पूंजीगत लाभ विवरण के लिए अपने ब्रोकर और म्यूचुअल फंड क्लियरिंग हाउस से पूछें।
गलती नंबर-4
छूट को शामिल न करना
आपरो धारा 80टीटीए के तहत 10,000 रुपये तक के बचत बैंक ब्याज पर छूट के पात्र हैं। वरिष्ठ नागरिकों को धारा 80TTB के तहत 50,000 रुपये की अधिक छूट मिलती है।
गलती नंबर-5
विदेशी आय और संपत्तियों की सूचना नहीं देना
सभी विदेशी संपत्तियों की जानकारी टैक्स रिटर्न में दी जानी चाहिए। इनमें विदेशी कंपनियों के शेयर, विदेशी कंपनियों से आय और यहां तक कि विदेशी बैंक खातों में पड़ी छोटी रकम भी शामिल हैं।
गलती नंबर-6
घाटे की रिपोर्ट न करना
यदि कर रिटर्न में रिपोर्ट की गई है तो निवेश (फंड, स्टॉक, एफ एंड ओ) से होने वाले नुकसान को अन्य लाभ के मुकाबले समायोजित किया जा सकता है। असमायोजित घाटे को आठ वित्तीय वर्षों तक आगे बढ़ाया जा सकता है।
गलती नंबर-7
छूट योग्य कटौती योग्य व्यय
निवारक स्वास्थ्य जांच धारा 80डी के तहत 5,000 रुपये तक की कर कटौती के लिए पात्र हैं। वरिष्ठ नागरिकों के चिकित्सा व्यय भी कटौती योग्य हैं। कुछ बीमारियों और विकलांगताओं पर भी कर कटौती मिलती है।
गलती नंबर-8
क्लबिंग को नजरअंदाज करना
18 साल से कम उम्र के बच्चे के नाम पर निवेश से होने वाली आय को माता-पिता के साथ जोड़ दिया जाता है। जीवनसाथी को उपहार में दिए गए धन से होने वाली आय को भी देने वाले की आय के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
