कभी मुगल करते थे दिल्ली पर राज,अब पंजाबी-सिंधी शरणार्थियों की धाक,इस हुनर ने बनाया सुल्तान

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  • Updated Aug 14, 2023, 05:37 PM IST

76th Independence Day, History Of Delhi After Partition: बंटवारे से पहले दिल्ली में मुख्य रूप से मुस्लिम, राजपूत और बनियों का बोलबाला था। और उस वक्त की दिल्ली पुरानी दिल्ली और लुटियन दिल्ली तक सिमटी हुई थी। लेकिन आजादी के बाद जिस तरह भारत और पाकिस्तान के लोगों ने विभाजन की त्रासदी झेली, उसने दिल्ली में कई ऐसे इलाके विकसित कर दिए जो आज उसके सबसे महंगे इलाके बन गए।

76th Independence Day, History Of Delhi After Partition: दिल्ली सात बार उजड़ी और सात बार बसी, लेकिन आज की दिल्ली पर जो ऐतिहासिक छाप दिखती है, उसमें सबसे ज्यादा असर मुगलों का है। चाहे लाल किला, पुराना किला हो या फिर जामा मस्जिद, हुमायूं का मकबरा और चांदनी चौक, यह सब जगहें उसी दौर की कहनी बयां करती हैं। लेकिन आज की दिल्ली जो हम देखते हुए, वह मुगलों की बसाई नहीं है। बल्कि उन शरणार्थियों की है, जिन्होंने भारत-पाक के बंटवारे का दंश झेला है। ये शरणार्थी पाकिस्तान में अपना सब कुछ गंवाकर भारत में अपनी जान बचाकर आए थे। और उन्होंने अपनी लगन और हुनर से दिल्ली को एक नया अवतार दिया। इन शरणार्थियों के पसीनों का ही नतीजा है कि दिल्ली में के सबसे महंगे इलाके डेवलप हुए। जो आज खान मार्केट, लाजपत नगर, चितरंजन पार्क, मालवीय नगर, कालकाजी, ग्रेटर कैलाश के नाम से आज एक नई पहचान रखते हैं।

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बंटवारे ने बदल दी दिल्ली

बंटवारे ने बदली पहचान

बंटवारे से पहले दिल्ली में मुख्य रूप से मुस्लिम, राजपूत और बनियों का बोलबाला था। और उस वक्त की दिल्ली पुरानी दिल्ली और लुटियन दिल्ली तक सिमटी हुई थी। लेकिन आजादी के बाद जिस तरह भारत और पाकिस्तान के लोगों ने विभाजन की त्रासदी झेली, उसने दिल्ली में कई ऐसे इलाके विकसित कर दिए जो आज उसके सबसे महंगे इलाके बन गए। पाकिस्तान से आए पंजाबी-सिंधी-मारवाड़ी जैसे बिजनेस क्लास ने इन इलाकों में शरण ली और उन्होंने अपनी मेहनत से दिल्ली में अपनी एक नई पहचान बनाई।

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