ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, अमेरिका द्वारा व्यापारिक साझेदारों पर लगाए जा रहे जवाबी शुल्क का भारत पर खास असर नहीं पड़ेगा। इसका मुख्य कारण यह है कि दोनों देशों के निर्यात ढांचे में काफी भिन्नता है।
यदि अमेरिका अप्रैल 2025 में कोई नया शुल्क नीति लागू करता है, तो भारत भी 2019 की तरह जवाबी कार्रवाई कर सकता है।
भारतीय निर्यात पर कोई विशेष प्रभाव नहीं
संस्थान के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने बताया कि यदि अमेरिका भारतीय पिस्ता पर 50% शुल्क लगाता है, तो इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि भारत पिस्ता निर्यात ही नहीं करता। इसके अलावा, भारत अमेरिका को होने वाले कुल निर्यात का 75% हिस्सा केवल 5% औसत शुल्क के दायरे में आता है। हालांकि, भारत को कपड़ा, परिधान और जूते जैसी श्रम-प्रधान वस्तुओं पर 15-35% अमेरिकी शुल्क का सामना करना पड़ता है।
जवाबी शुल्क को लेकर भारत की रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की जवाबी शुल्क नीति से भारत को अधिक नुकसान नहीं होगा। भारत पहले भी 2019 में डोनाल्ड ट्रंप सरकार के दौरान इस तरह की नीति का सामना कर चुका है। यदि अप्रैल 2025 में अमेरिका कोई फैसला लेता है, तो भारत भी उसी के अनुरूप जवाबी कार्रवाई कर सकता है।
भारत-अमेरिका व्यापार संबंध
अप्रैल-नवंबर 2024-25 में, भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार 82.52 अरब डॉलर का रहा, जिसमें भारत ने 52.89 अरब डॉलर का निर्यात और 29.63 अरब डॉलर का आयात किया। अमेरिका उन कुछ देशों में शामिल है, जिनके साथ भारत का व्यापार अधिशेष (23.26 अरब डॉलर) बना हुआ है।
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार
साल 2023-24 में भारत और अमेरिका के बीच 119.71 अरब डॉलर का व्यापार हुआ, जिसमें 77.51 अरब डॉलर का निर्यात और 42.19 अरब डॉलर का आयात शामिल था। भारत को अमेरिका के साथ 35.31 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष प्राप्त हुआ।
