तेल के खेल में 1 डॉलर की तेजी कैसे भारत में मच जाता है हाहाकार; समझिए $1 की तेजी से आपकी जेब पर कितना पड़ता है बोझ

अगर क्रूड ऑयल सिर्फ 1 डॉलर महंगा होता है, तो भारत का सालाना आयात बिल (Import Bill) लगभग 2 बिलियन डॉलर (करीब 16,500 करोड़ रुपये) बढ़ जाता है। इसका सीधा मतलब यह है कि देश का कीमती विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घटता है और राजकोषीय घाटे पर दबाव बढ़ता है।

ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच भड़की आग की वजह कच्चे तेल की कीमतों में आग लगा दी है। मौजूदा समय में कच्चा तेल 83 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जो भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है। भारत के लिए चिंता की बात यह है कि कच्चे तेल की कीमतों में होने वाली महज 1 डॉलर की बढ़ोतरी हमारे देश के पूरे आर्थिक गणित को बिगाड़ कर रख देती है। इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड का दाम 1 डॉलर भी चढ़ता है तो महंगाई से लेकर रुपए की वैल्यू तक सब कुछ हिल जाता है। यह महज 1 डॉलर की तेजी भारत के विकास की रफ्तार पर ब्रेक लगाने और आपकी थाली को महंगा करने के लिए काफी है।

Crude Oil Prices

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर क्रूड ऑयल सिर्फ 1 डॉलर महंगा होता है, तो भारत का सालाना आयात बिल (Import Bill) लगभग 2 बिलियन डॉलर (करीब 16,500 करोड़ रुपये) बढ़ जाता है। इसका सीधा मतलब यह है कि देश का कीमती विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घटता है और राजकोषीय घाटे पर दबाव बढ़ता है।

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