Financial Inclusion 2.0: देश में वित्तीय समावेश को मजबूत बनाने के लिए वित्त मंत्रालय ने एक अहम बैठक आयोजित की। इस बैठक की अध्यक्षता वित्तीय सेवा सचिव एम. नागराजू ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को बैंकिंग और औपचारिक ऋण व्यवस्था से जोड़ने की रणनीति तैयार करना था, जो अब तक संगठित कर्ज प्रणाली से बाहर हैं। मंत्रालय ने बताया कि बैठक में विभिन्न संबंधित पक्षों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
वित्तीय समावेश 2.0 की दिशा में बड़ा कदम: सभी तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने की तैयारी (तस्वीर-istock)
वित्तीय समावेश 2.0 का खाका
बैठक में “वित्तीय समावेश 2.0” के लिए एक विस्तृत योजना दस्तावेज तैयार करने पर विचार-विमर्श हुआ। इस योजना का उद्देश्य है कि देश के हर नागरिक तक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की जाए। इसके तहत गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों में बैंकिंग ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया गया। सरकार चाहती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक शाखाओं, बैंकिंग संवाददाताओं और डिजिटल सेवाओं का विस्तार हो, ताकि लोगों को बैंकिंग सुविधाओं के लिए दूर न जाना पड़े।
महिलाओं और कमजोर वर्गों पर विशेष ध्यान
चर्चा में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि महिलाओं और समाज के कमजोर वर्गों को औपचारिक ऋण आसानी से मिल सके। अभी भी बड़ी संख्या में लोग साहूकारों या अनौपचारिक स्रोतों से कर्ज लेते हैं, जिससे उन्हें अधिक ब्याज देना पड़ता है। सरकार की योजना है कि ऐसे लोगों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा जाए, ताकि वे कम ब्याज दर पर सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से ऋण प्राप्त कर सकें। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
2047 तक बीमा और पेंशन का लक्ष्य
बैठक में वर्ष 2047 तक सभी नागरिकों को बीमा और पेंशन के दायरे में लाने के लक्ष्य पर भी चर्चा हुई। सरकार चाहती है कि हर व्यक्ति को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिले। इसके लिए बीमा योजनाओं और पेंशन योजनाओं की पहुंच को बढ़ाने की रणनीति तैयार की जा रही है। खासकर असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को इन योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया गया।
डिजिटल और नवोन्मेषी उत्पादों पर फोकस
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक वित्त मंत्रालय ने डिजिटल और नवाचार आधारित वित्तीय उत्पादों के विकास पर भी बल दिया। खासतौर पर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के उपायों पर चर्चा की गई। सरकार का मानना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों को तेज, सुरक्षित और आसान सेवाएं मिलेंगी। इसके लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी, डिजिटल बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग सेवाओं को मजबूत बनाने की जरूरत बताई गई।
वित्तीय और डिजिटल साक्षरता पर जोर
बैठक में वित्तीय और डिजिटल साक्षरता को बढ़ाने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। वयस्कों के साथ-साथ माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के छात्रों को भी वित्तीय जानकारी देने पर बल दिया गया। लोगों को बचत, निवेश, बीमा और पेंशन योजनाओं की जानकारी होनी चाहिए, ताकि वे सही निर्णय ले सकें। साथ ही डिजिटल धोखाधड़ी से बचने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की भी योजना है।
पूर्वोत्तर क्षेत्र पर विशेष ध्यान
वित्तीय सेवा सचिव एम. नागराजू ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्रत्येक अनुमंडल में कम से कम एक बैंक शाखा होना जरूरी है। इससे वहां के लोगों को बैंकिंग सेवाओं तक आसान पहुंच मिलेगी। उन्होंने बीमा और पेंशन कवरेज को बढ़ाने और बैंकिंग प्रणाली से बाहर रह गए लोगों को औपचारिक ऋण ढांचे में शामिल करने के उपायों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
जल्द जारी होगी अंतिम रिपोर्ट
वित्त मंत्रालय ने कहा कि इस चर्चा के आधार पर आगे और विचार-विमर्श किया जाएगा और जल्द ही एक अंतिम रिपोर्ट जारी की जाएगी। इस रिपोर्ट में देश में वित्तीय समावेश को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम और समयबद्ध योजना शामिल होगी। सरकार का लक्ष्य है कि हर नागरिक को बैंकिंग, बीमा, पेंशन और ऋण जैसी सुविधाओं का लाभ मिले और देश आर्थिक रूप से अधिक मजबूत बने।
