Gold Demand Rise: जुलाई और अगस्त में कमजोर मानसून और अल-नीनो तूफान के डर के बावजूद, कम कीमतों के चलते जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत में सोने की मांग साल-दर-साल आधार पर 10 फीसदी बढ़ कर 210 टन हो गई।
सोने की मांग में बढ़ोतरी
इस मांग का ज्यादातर हिस्सा ग्रामीण भारत का रहा। भारत में सोने की कुल खपत का 60 फीसदी हिस्सा ग्रामीण इलाकों का ही रहता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) के अनुसार 2023 में भारत में सोने की खपत 700-750 टन आंकी गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ा कम होगी।
ग्लोबल लेवल पर भी बढ़ी मांग
वैश्विक स्तर पर देखें तो WGC Q3 गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स रिपोर्ट से पता चलता है कि सोने की तरफ आकर्षण जारी है। केंद्रीय बैंकों की तरफ से भी ऐतिहासिक गति पर खरीदारी हो रही है। इससे तिमाही में सोने की ग्लोबल मांग 1,147 टन हो गई है, जो इसके पांच साल के औसत से 8% अधिक है।
भारत में सोने के आभूषणों की बिक्री साल-दर-साल 7% बढ़कर 155.7 टन हो गई, जो सोने की नरम कीमतों और त्योहारी मांग के कारण अधिक रही। दक्षिणी भारत में सोने की ज्वैलरी की बिक्री अधिक दिखी।
कितनी कम हुई कीमतें
रिटेल मांग बढ़ने से जुलाई में 60,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक चढ़ने के बाद अगस्त और सितंबर में सोने की कीमतें गिरकर 57,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गईं। वहीं सोने की निवेश मांग, यानी बार और सिक्के, पिछले वर्ष की तीसरी तिमाही में 45.4 टन से 20% बढ़कर 54.5 टन हो गई।
डब्ल्यूजीसी के अनुसार, त्योहारों और शादी की खरीदारी के बीच अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में भी सोने की मांग में तेजी देखने को मिलने सकती है, लेकिन कीमतों में वृद्धि से मांग बढ़ने में देरी भी हो सकती है।
