महंगाई ने भारतीयों का गोल्ड से मोह किया भंग ! गांवों के नंबर कर देंगे हैरान

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  • Updated Nov 1, 2022, 05:41 PM IST

Gold Demand Dips In India: वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के अनुसार अक्टूबर से दिसंबर के महीनों में भारत की सोने की खपत में साल 2021 की इसी अवधि की तुलना में करीब 27 फीसदी की गिरावट आ सकती है। वहीं, बढ़ती महंगाई के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में गोल्ड की डिमांड में ज्यादा गिरावट दिख सकती है।

KEY HIGHLIGHTS
  • सितंबर में महंगाई दर 5 महीने के सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गई थी।
  • मांग कम होने का असर गोल्ड की कीमतों में गिरावट के रूप में पर दिख रहा है।
  • ग्रामीण इलाकों में दिख रहा है। जहां से भारत की दो तिहाई गोल्ड डिमांड आती है।

Gold Demand Dips In India: महंगाई अब भारतीयों के सबसे बड़े शौक पर अंकुश लगा रही है। भारतीय अब कम गोल्ड खरीद रहे हैं। और इसका असर यह रहा है कि दिसंबर तक (अक्टूबर-दिसंबर तिमाही) गोल्ड की मांग में 27 फीसदी गिरावट आने का अनुमान है। जिसका सबसे ज्यादा असर ग्रामीण इलाकों में दिख रहा है। जहां से भारत की दो तिहाई गोल्ड डिमांड आती है। मांग में कमी का आलम यह है कि अक्टूबर-दिसंबर की तिमाही में गोल्ड की खपत 344 लाख टन से गिरकर 250 लाख टन पर आ सकती है। बेकाबू महंगाई का आलम यह है कि लगातार टारगेट से ज्यादा रहने के कारण आरबीआई 3 नवंबर को एक स्पेशल मीटिंग करने जा रहा है। जिसमें वह सरकार को महंगाई काबू में नहीं आने के कारणों पर विस्तृत रिपोर्ट देगा। सितंबर में महंगाई दर 5 महीने के सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। उस समय महंगाई दर 7.41 फीसदी थी।

Gold Demand In India

गोल्ड से लोग बना रहे हैं दूरी !

गोल्ड की कीमत भी गिरी

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के अनुसार अक्टूबर से दिसंबर के महीनों में भारत की सोने की खपत में साल 2021 की इसी अवधि की तुलना में करीब 27 फीसदी की गिरावट आ सकती है। वहीं, बढ़ती महंगाई के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में गोल्ड की डिमांड कम हो सकती है। WGC के इंडियन ऑपरेशंस के रिजन सीईओ सोमसुंदरम पीआर ने न्यूज एजेंसी रायटर को बताया कि भारत में सोने की दो-तिहाई मांग ग्रामीण क्षेत्रों से आती है, जहां ज्वैलरी, पूंजी इकट्ठा करने का जरिया है। दिसंबर तिमाही में भारत की सोने की मांग एक साल पहले के 343.9 टन से गिरकर करीब 250 टन रह सकती है। और पूरे साल में भारत की कुल सोने की खपत को लगभग 750 टन तक ला सकती है, जो पिछले साल के 797.3 टन से कम रहेगी।

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