Gold Tax Rules: सोना बेचने से पहले जान लें टैक्स के ये नियम, वरना मुनाफे पर लग जाएगा चूना!

Gold Tax Rules: सोना बेचने या ट्रांसफर करने पर विभिन्न रूपों जैसे ज्वेलरी, ईटीएफ, म्यूचुअल फंड और एसजीबी पर अलग-अलग कैपिटल गेन्स टैक्स नियम लागू होते हैं। निवेशकों को टैक्स देनदारी से बचने के लिए इन्हें बिक्री से पहले जरूर समझना चाहिए।

Gold Tax Rules : भारत में सोने का केवल सांस्कृतिक महत्व ही नहीं है, बल्कि इसे एक बेहद सुरक्षित और मजबूत निवेश भी माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सोना बेचने पर मिलने वाला पूरा पैसा आपका नहीं होता? फिजिकल ज्वेलरी बेचने से लेकर गोल्ड ईटीएफ और डिजिटल गोल्ड तक सोने के हर रूप को बेचने पर टैक्स के नियम पूरी तरह से अलग हैं। इसलिए सोना बेचने या अपने निवेश को भुनाने से पहले कैपिटल गेन्स टैक्स के नियमों को समझ लेना बेहद जरूरी है, ताकि आपको किसी कानूनी अड़चन या इनकम टैक्स विभाग के नोटिस का सामना न करना पड़े।

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सोना बेचने की सोच रहे हैं? तो जान लें ज्वेलरी, ETF, SGB और गिफ्ट पर टैक्स के ये बड़े नियम (तस्वीर-istock)

खरीदने का तरीका और समय तय करता है टैक्स की रकम

सोने पर टैक्स इस बात से तय होता है कि आपने इसे किस रूप में खरीदा है और आपके पास यह कितने समय से है। जुलाई 2024 के बदलावों और आयकर अधिनियम 2025 के तहत, अब फिजिकल गोल्ड (गहने, सिक्के, बार), डिजिटल गोल्ड और गोल्ड म्यूचुअल फंड्स को 24 महीने (2 साल) से अधिक समय तक रखने पर लॉन्ग टर्म माना जाता है। इस पर 12.5% (प्लस 4% सेस) की दर से 'लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स' लगता है। गौरतलब है कि अब इसमें 'इंडेक्सेशन' का लाभ खत्म कर दिया गया है। इसका मतलब है कि महंगाई के असर को घटाए बिना आपको कुल मुनाफे पर पूरा टैक्स देना होगा। वहीं अगर आप 24 महीने से पहले सोना बेचते हैं, तो इसे शॉर्ट टर्म माना जाएगा और मुनाफा आपकी इनकम में जुड़कर आपकी टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा।

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