भारत में 10 मिनट में किराना और खाने-पीने का सामान पहुंचाने वाली कंपनियों पर सरकार की निगरानी बढ़ने वाली है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ऑनलाइन डिलीवरी और क्विक कॉमर्स कंपनियों के लिए नियम सख्त करने की तैयारी कर रहा है। इस कदम का असर Blinkit, Zepto, Swiggy Instamart और Amazon Now जैसे प्लेटफॉर्म पर पड़ सकता है। इसका मकसद ग्राहकों को सुरक्षित खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराना और कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले सामान के लिए अधिक जवाबदेह बनाना है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का ऑनलाइन बाजार करीब 80 अरब डॉलर का है और खाद्य नियामक अब इस क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान दे रहा है।
80 अरब डॉलर के ऑनलाइन डिलीवरी बिजनेस पर सरकार की सख्ती
क्या है FSSAI का कहना?
FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजित पुनहानी ने कहा है कि नियामक ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए नियमों को सख्त बनाने और उनकी जवाबदेही तय करने की दिशा में काम कर रहा है। हाल के समय में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले खाद्य उत्पादों की जानकारी को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। कई बार ग्राहकों को ऑर्डर देने से पहले उत्पाद की एक्सपायरी डेट, मैन्युफैक्चरिंग डेट या बैच नंबर जैसी जानकारी आसानी से नहीं मिलती। ऐसे में ग्राहक यह तय नहीं कर पाते कि उत्पाद कितना ताजा है और उसकी इस्तेमाल करने की अवधि कितनी बची है।
सरकार की योजना के तहत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उत्पादों की जानकारी को अधिक स्पष्ट बनाने और खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा सकता है। नियामक क्विक कॉमर्स कंपनियों के डार्क स्टोर यानी उन गोदामों का भी निरीक्षण कर रहा है, जहां से ऑर्डर तैयार करके ग्राहकों तक भेजे जाते हैं। इन जगहों पर खाद्य पदार्थों को सही तरीके से रखना, उनकी गुणवत्ता बनाए रखना और खराब या एक्सपायर हो चुके सामान की बिक्री रोकना अहम है।
इन पर भी FSSAI की नजर
FSSAI की सख्ती सिर्फ ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियों तक सीमित नहीं है। नियामक खाद्य निर्माता कंपनियों, होटलों, रेस्टोरेंट और अन्य कारोबारों की भी जांच बढ़ा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच खाद्य सुरक्षा से जुड़ी करीब सात लाख जांच की गईं, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले लगभग दोगुनी थीं।
इस कदम से ग्राहकों को ऑनलाइन सामान खरीदते समय अधिक जानकारी मिलने और खाद्य सुरक्षा बेहतर होने की उम्मीद है। हालांकि, नियमों में बदलाव से कंपनियों को अपनी वेबसाइट और ऐप पर उत्पादों की जानकारी, भंडारण व्यवस्था और गुणवत्ता जांच में सुधार करना पड़ सकता है। नए नियमों का अंतिम स्वरूप और उनके लागू होने की तारीख स्पष्ट होने के बाद ही पता चलेगा कि कंपनियों के कामकाज पर कितना असर पड़ेगा।
