PM Modi France G7 Summit 2026 : फ्रांस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ्रांस दौरे से ठीक पहले मेक इन इंडिया के पूरा सपोर्ट देने की बात कही है। इसके साथ ही लंबे समय से अटकी Rafale Deal को लेकर बड़े पॉलिसी शिफ्ट का इशारा किया है। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि PM Modi France Visit 2026 भारत और फ्रांस के बीच डिफेंस साझेदारी को नए मुकाम पर ले जा सकती है।
मेक इन इंडिया को मिलेगा बूस्ट
खरीद-फरोख्त से आगे बढ़ेंगे रिश्ते
फ्रांस ने भारतीय वायुसेना के लिए 114 नए राफेल फाइटर जेट्स (MRFA प्रोग्राम) के मेगा सौदे में फुल टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) और भारतीय हथियारों के इंटिग्रेशन पर अपनी सहमति जताई है। हालांकि, अभी इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। लेकिन, TOI को दिए गए इंटरव्यू के दौरान भारत में फ्रांस के राजदूत थिएरी माथू ने कहा, पेरिस, नई दिल्ली के साथ अपने रिश्तों को महज एक 'खरीदार और विक्रेता' के रूप में नहीं देखता। दोनों देशों के बीच इस समय बेहद गंभीर रणनीतिक चर्चा चल रही है। मेक इन इंडिया का सपोर्ट करते हुए माथू ने कहा, फ्रांस ने भारत के साथ कई अन्य रक्षा कार्यक्रम विकसित किए हैं, हमारा इरादा है कि यह नई खरीद (114 राफेल विमान) भी पूरी तरह से 'Make in India' की जरूरतों के मुताबिक हो।
फ्रांस देगा राफेल के 'टॉप सीक्रेट'
ट्रिब्यून सहित कई मीडिया रिपोट्स में राजनयिक सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि भारत ने इस इंटरगवर्नमेंटल एग्रीमेंट (IGA) के तहत फ्रांस को आधिकारिक लेटर ऑफ रिक्वेस्ट (LoR) भेजा है। इस डील की सबसे बड़ी शर्त यह है कि 114 में से 94 राफेल विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इसके लिए फुल टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) सबसे अहम शर्त है, जिसे फ्रांस ने मान लिया है, क्योंकि भारत राफेल जेट्स में स्वदेशी हथियारों को लोड करना चाहता है। इस तरह से ये रिपोर्ट बताती हैं कि फ्रांस ने भारत की उन शर्तों को पूरी तरह स्वीकार कर लिया है, जिन पर भारत कोई समझौता नहीं करना चाहता था।
भारत को क्या फायदा?
टेक्नोलॉजी ट्रांसफर असल में मेक इन इंडिया को सपोर्ट देगा। 114 में से 94 राफेल लड़ाकू विमान भारत में बनेंगे, इससे भारत में न केवल रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। बल्कि, एन्सिलरी एविएशन इंडस्ट्री भी विवसित होगी। इसके अलावा भारत अपनी जरूरतों के मुताबिक इन जेट्स को ऑप्टिमाइज कर पाएगा, ताकि भारतीय कंडीशन में इनसे और बेहतर नतीजे हासिल किए जा सकें।
लॉन्ग टर्म ऑपरेशन कॉस्ट
टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का यह मतलब नहीं है कि भारत अब फ्रांस के बिना खुद ही राफेल बना लेगा। बल्कि, यह फ्रांस पर इन जेट्स के लॉन्ग टर्म ऑपरेशन को स्थिर और किफायती बनाने में अहम है। इसकी वजह से न केवल भारत इन जेट्स को अपने स्तर पर मोडिफाई कर पाएगा, बल्कि मेंटेनेंस कॉस्ट भी घटेगी। इसके साथ ही देसी हथिायारों के इंटीग्रेशन की वजह से इनकी लॉन्ग टर्म ऑपरेशनल कॉस्ट भी घटेगी।
60% तक स्वदेशी होंगे राफेल
रिपोर्ट्स के मुताबिक तकनीक के पूरी तरह ट्रांसफर होने के बाद, इन घातक विमानों में 55 से 60 प्रतिशत हिस्सा 'मेड इन इंडिया' होगा। विमान के इंजन, एयरफ्रेम और एवियोनिक्स (Avionics) की संवेदनशील तकनीक भारत को ट्रांसफर की जाएगी। इसमें डसॉल्ट के साथ इंजन मेकर 'सफ्रान' और एवियोनिक्स प्रदाता 'थैलेस' भी शामिल हैं।
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अपग्रेड होगी वायुसेना की क्षमता
भारतीय वायुसेना इस समय राफेल का 'F3R' वर्जन उड़ा रही है, लेकिन नए सौदे में भारत को अपग्रेड हो चुका 'F-4' वर्जन और भविष्य का 'F-5' वर्जन मिलेगा। इन नए विमानों में पायलट की मदद के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एल्गोरिदम, लंबी दूरी का अत्याधुनिक AESA राडार और ग्राउंड कंट्रोलर्स को रियल-टाइम डेटा भेजने के लिए बेहद सुरक्षित डेटा लिंक्स दिए जाएंगे।
