Share Market Opening: कल की भारी उथल-पुथल के बाद आज बुधवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बेहद सुस्त और सपाट देखने को मिली। वैश्विक बाजारों से मिल रहे मिले-जुले संकेतों के बीच बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स (BSE Sensex) महज 20.02 अंकों की मामूली कमजोरी के साथ 75,989.68 के स्तर पर खुला। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 (Nifty 50) भी बिना किसी बड़े बदलाव के सीमित दायरे में कारोबार करता नजर आया। ईरान संकट के चलते बने भू-राजनीतिक तनाव और बाजार में लगातार जारी प्रॉफिट बुकिंग की वजह से निवेशक फिलहाल फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की सकारात्मक उम्मीदों के चलते इस हफ्ते शेयर बाजार में रौनक बनी हुई है और यह हरे निशान में कारोबार कर रहा है। ऐसे में आज के कारोबारी सत्र में भी निवेशकों को पूरी उम्मीद होगी कि बाजार में खरीदारी (लिवाली) का यह सिलसिला लगातार जारी रहे।
निफ्टी आईटी और बैंक को छोड़, बाकी सेक्टर्स में हरियाली
सुबह के शुरुआती कारोबार में बाजार की इस रफ्तार को मुख्य रूप से ऑटो सेक्टर के शेयरों ने लीड किया। इस तेजी के चलते निफ्टी ऑटो, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी इन्फ्रास्ट्रक्चर और निफ्टी पीएसई सहित ज्यादातर सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में मजबूती के साथ टिके रहे। इस दौरान केवल निफ्टी आईटी और निफ्टी बैंक इंडेक्स में ही हल्की गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार देखने को मिला।
बाजार की इस चौतरफा तेजी में लार्जकैप शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी कदम से कदम मिलाकर दौड़ रहे थे। आंकड़ों की बात करें तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 183 अंक या 1.02 फीसदी की शानदार मजबूती के साथ 18,149 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स भी 433 अंक या 0.71 फीसदी की बढ़त दर्ज करते हुए 61,847 के लेवल पर कारोबार कर रहा था।
क्रूड ऑयल 100 डॉलर के नीचे आया
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की उभरती उम्मीदों का सबसे बड़ा और सीधा सकारात्मक असर वैश्विक कमोडिटी मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला है। पिछले लगातार तीन दिनों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) के दाम $100 प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे बने हुए हैं और इसी दायरे में कारोबार कर रहे हैं। भारत जैसे बड़े तेल आयातक (Oil Importing) देश के लिए, जो अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल बाहर से खरीदता है, वैश्विक स्तर पर क्रूड का $100 के नीचे आना एक बहुत बड़ी और सुकून देने वाली राहत मानी जा रही है। इससे देश के आयात बिल में कमी आएगी और घरेलू स्तर पर महंगाई को काबू में रखने में मदद मिलेगी।
