EPF या PPF: सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के रिटायरमेंट के लिए कौन बेहतर? कहां इंवेस्ट करने में है समझदारी

EPF vs PPF: सैलरीड कर्मचारियों के लिए EPF पहली प्राथमिकता है क्योंकि इसमें नियोक्ता का योगदान भी मिलता है। वहीं, अतिरिक्त बचत और टैक्स-फ्री रिटर्न के लिए PPF एक बेहतरीन दूसरा विकल्प है।

EPF vs PPF : रिटायरमेंट की योजना बनाते समय हर नौकरीपेशा व्यक्ति के मन में सबसे पहला सवाल यही उठता है कि अपनी मेहनत की कमाई कहां निवेश की जाए। जब बात सुरक्षित और लंबी अवधि के निवेश की आती है, तो कर्मचारियों के सामने दो सबसे लोकप्रिय विकल्प होते हैं, कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और सार्वजनिक भविष्य निधि (PPF)। ये दोनों ही योजनाएं सरकार द्वारा समर्थित हैं, पूरी तरह सुरक्षित हैं और इनमें इनकम टैक्स नियमों के तहत बेहतरीन टैक्स छूट मिलती है। इसी वजह से कई बार यह तय कर पाना मुश्किल हो जाता है कि किसे प्राथमिकता दी जाए। हालांकि, वित्तीय एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन दोनों की तुलना करने के बजाय यह समझना ज्यादा जरूरी है कि ये आपकी वित्तीय योजनाओं में कैसे फिट बैठते हैं।

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EPF या PPF: सैलरीड क्लास को रिटायरमेंट फंड के लिए कहां लगाना चाहिए पहला दांव? (तस्वीर-AI)

EPF: आपकी रिटायरमेंट का स्वाभाविक और पहला कदम

अगर आप किसी संगठित क्षेत्र की कंपनी में काम करते हैं, तो आपकी सैलरी से हर महीने EPF का हिस्सा अपने आप कट जाता है। इसमें आपके वेतन का एक निश्चित हिस्सा आपके EPF खाते में जमा होता है, और उतना ही योगदान आपकी कंपनी (नियोक्ता) की तरफ से भी किया जाता है। स्वचालित रूप से पैसा कटने के कारण आपको अलग से मेहनत नहीं करनी पड़ती और नौकरी के पूरे कार्यकाल के दौरान आपके पास एक बहुत बड़ा फंड तैयार हो जाता है। कंपनी का योगदान इस योजना का सबसे बड़ा फायदा है, जो आपको PPF में नहीं मिलता। इसलिए, किसी भी वेतनभोगी कर्मचारी के लिए EPF ही रिटायरमेंट प्लानिंग का पहला आधार बनता है।

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