EPF vs NPS: हर महीने 5000 रुपये के निवेश से 30 साल में किसमें कितना बनेगा फंड? कौन बेहतर, समझें कैलकुलेशन

EPF vs NPS: एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में हर महीने 5000 रुपये के निवेश करते हैं तो 30 साल में आपके पास कितना बड़ा फंड हो जाएगा। जानें कौन सबसे ज्यादा फायदेमंद रहेगा।

EPF vs NPS : रिटायरमेंट के बाद आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर रहने के लिए एक बड़ा फंड तैयार करना बहुत जरूरी है। भारत में इसके लिए एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) दो सबसे लोकप्रिय विकल्प हैं। कई लोग इन दोनों में ही निवेश करते हैं, जबकि कुछ किसी एक को चुनते हैं। अगर आप 30 साल की उम्र से हर महीने 5,000 रुपये का निवेश शुरू करते हैं और हर साल अपनी निवेश राशि में 5% की बढ़ोतरी करते हैं तो 60 साल की उम्र तक कौन सा विकल्प आपको ज्यादा रिटर्न दे सकता है? आइए आसान भाषा में इसका गणित और दोनों स्कीम्स का फर्क समझते हैं।

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EPF में सरकारी सुरक्षा या NPS में मार्केट का रिटर्न (तस्वीर-AI)

EPF से 30 साल में कितना फंड बनेगा?

EPF में मिलने वाला ब्याज सरकार द्वारा हर साल तय किया जाता है। मान लीजिए कि आपका बेसिक वेतन और DA मिलाकर 41,666 प्रति महीना है। आप अपनी तरफ से 12% यानी 5,000 हर महीने EPF में जमा करते हैं और हर साल इसमें 5% का इजाफा करते हैं। मौजूदा 8.25% की सालाना ब्याज दर अगले 30 वर्षों तक स्थिर मान ली जाए, तो 60 साल की उम्र में आपके पास अनुमानित 2.21 करोड़ का रिटायरमेंट फंड तैयार हो सकता है। इस गणना में कंपनी का 3.67% का योगदान भी शामिल है। हालांकि ध्यान रखने वाली बात यह है कि EPF की ब्याज दरें समय-समय पर बदलती रहती हैं। उदाहरण के लिए, 1990 के दशक में यह 12% तक थी, जबकि हाल के वर्षों में यह 8% से 8.75% के दायरे में रही है।

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