दीवाली के मौके पर खरीदारी के लिए अब ग्राहकों को सिर्फ तेज डिलीवरी से खुश नहीं किया जा सकता। लोग चाहते हैं कि सामान अच्छी क्वालिटी का हो, कीमत किफायती रहे और बिल बनाते समय अचानक अतिरिक्त चार्ज भी न जुड़ जाएं। क्विक कॉमर्स कंपनियों के बीच भले ही 10 मिनट में सामान पहुंचाने की होड़ मची हो, लेकिन ग्राहकों की प्राथमिकताएं कुछ और ही कहानी बता रही हैं। LocalCircles के एक सर्वे के मुताबिक, त्योहारी खरीदारी में 71% उपभोक्ता अच्छी कीमत और पैसे की सही वैल्यू को प्राथमिकता देते हैं, जबकि 65% लोगों के लिए उत्पाद की गुणवत्ता सबसे अहम है। इससे साफ है कि अब ग्राहक केवल रफ्तार नहीं, बल्कि सही दाम पर अच्छा सामान चाहते हैं।
दीवाली पर Quick Commerce की नई पसंद, ग्राहक चाहते हैं सस्ता और क्वालिटी वाला सामान/file photo (AI)
10 मिनट की डिलीवरी से ज्यादा जरूरी सही कीमत और क्वालिटी
दीवाली के त्योहारी सीजन में शहरी भारतीय परिवारों के करीब 1.97 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का अनुमान है। ऐसे में Blinkit, Swiggy Instamart, Zepto, Amazon Now और Flipkart Minutes जैसे प्लेटफॉर्म ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए लगातार कोशिश कर रहे हैं। लेकिन LocalCircles के सर्वे से पता चलता है कि तेज डिलीवरी अब खरीदारी का अकेला आधार नहीं है।
सर्वे में केवल 22% लोगों ने तेज डिलीवरी को प्राथमिकता दी। इसके मुकाबले 71% उपभोक्ताओं ने सबसे अच्छी कीमत और कुल वैल्यू को अहम बताया, जबकि 65% ने उत्पाद की गुणवत्ता को अपनी प्राथमिकता माना। वहीं, 43% ग्राहक ऐसे प्लेटफॉर्म पसंद करते हैं, जहां अतिरिक्त शुल्क कम हो या बिल्कुल न लगे।
सस्ता सामान दिखाकर महंगा बिल बनाने से परेशान ग्राहक
क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर खरीदारी करते समय ग्राहकों को अक्सर डिलीवरी फीस, हैंडलिंग चार्ज और छोटे ऑर्डर पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क का सामना करना पड़ता है। सर्वे में 60% उपभोक्ताओं ने कहा कि ऐसे चार्ज अक्सर उनके अनुमान से ज्यादा बिल बना देते हैं। इनमें 42% लोगों के मुताबिक ऐसा बहुत बार होता है। इसके उलट, केवल 26% उपभोक्ताओं का मानना है कि अतिरिक्त शुल्क का उनके बिल पर शायद ही कभी असर पड़ता है।
यही वजह है कि ग्राहक अब सिर्फ ऐप पर दिखाई जा रही कीमत देखकर खरीदारी नहीं करना चाहते। वे यह भी जानना चाहते हैं कि सामान घर पहुंचने तक उन्हें कुल कितनी रकम चुकानी होगी। उपभोक्ता मामलों के विभाग की ओर से भी ड्रिप प्राइसिंग और डार्क पैटर्न जैसी भ्रामक कारोबारी प्रथाओं पर निगरानी रखी जाती है। ग्राहकों के लिए जरूरी है कि ऑर्डर पूरा करने से पहले अंतिम बिल जरूर देख लें।
रोजमर्रा की खरीदारी में Blinkit आगे, त्योहारी जरूरतों में Amazon Now की पसंद
सर्वे में अलग-अलग क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल में भी अंतर सामने आया है। रोजमर्रा के सामान की खरीदारी के मामले में Blinkit 31% यूजर्स के साथ पहले स्थान पर है। Amazon Now को 25% लोगों ने अपनी पसंद बताया। वहीं, त्योहारी खरीदारी और आखिरी समय की जरूरतों के लिए Amazon Now 22% के साथ आगे रहा, जबकि Blinkit को 19% लोगों ने पसंद किया। इसके बाद Zepto को 14% और BigBasket को 12% उपभोक्ताओं ने चुना।
उपभोक्ता रेटिंग के मामले में Amazon Now और Zepto ने 35 में से 27.5 अंक हासिल किए। वहीं, Blinkit को डिलीवरी की रफ्तार के लिए सबसे ज्यादा अंक मिले, लेकिन कीमत की वैल्यू और शुल्क की पारदर्शिता जैसे पहलुओं पर उसे अपेक्षाकृत कम अंक मिले। इससे पता चलता है कि अलग-अलग प्लेटफॉर्म की ताकत अलग है और ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से उनका चुनाव कर रहे हैं।
₹200 से ₹999 की खरीदारी में अतिरिक्त चार्ज बनते हैं परेशानी
क्विक कॉमर्स का इस्तेमाल मुख्य रूप से छोटे और मध्यम ऑर्डर के लिए हो रहा है। सर्वे के मुताबिक, 69% ग्राहक आमतौर पर 200 से 999 रुपये के बीच की खरीदारी करते हैं। वहीं, केवल 16% लोग 1,000 रुपये या उससे अधिक का ऑर्डर देते हैं। छोटे ऑर्डर पर डिलीवरी और हैंडलिंग फीस का असर ज्यादा महसूस होता है। सर्वे में 400 रुपये से कम खर्च करने वाले 27% उपभोक्ताओं ने इन शुल्कों को सबसे बड़ी परेशानी बताया।
ऐसे में ग्राहकों के लिए केवल कुछ मिनट में सामान मिलना ही फायदे का सौदा नहीं है। अगर कम कीमत का सामान खरीदने पर अतिरिक्त चार्ज काफी बढ़ जाएं, तो क्विक कॉमर्स का आकर्षण कम हो सकता है। कंपनियों को भी ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने के लिए कीमत और शुल्क की जानकारी साफ-साफ देनी होगी।
क्विक कॉमर्स कंपनियों के लिए साफ संदेश
दीवाली की खरीदारी से मिले संकेत बताते हैं कि ग्राहक सुविधा चाहते हैं, लेकिन इसके लिए ज्यादा कीमत चुकाने को तैयार हों, यह जरूरी नहीं है। वे अच्छी क्वालिटी का सामान, उचित कीमत और बिना छिपे हुए शुल्क के खरीदारी करना चाहते हैं। क्विक कॉमर्स कंपनियों के लिए अब चुनौती सिर्फ डिलीवरी का समय घटाना नहीं, बल्कि ग्राहकों को उनके पैसे की सही वैल्यू देना भी है। आखिरकार, कुछ मिनट बचाने से ज्यादा जरूरी यह है कि खरीदा गया सामान अच्छा हो, कीमत बजट में रहे और अंतिम बिल देखकर ग्राहक को झटका न लगे।
