अमेरिकी डॉलर के सामने आज रुपये में बड़ी गिरावट आई। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया बृहस्पतिवार को 38 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.46 पर बंद हुआ। इस तरह 1 डॉलर की कीमत फिर 95 रुपये से अधिक हो गई। अमेरिका और ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल की ऊंची कीमतों में उछाल आया है। इससे देश के आयात खर्च को लेकर बढ़ती चिंता से रुपये पर दबाव बढ़ा है, जिससे रुपये में गिरावट आई है।
रुपया टूटा
विदेशी निवेशकों के बिकवाली से संकट
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि रुपये पर इस समय विपरीत दबाव है। जुलाई और अगस्त में सकारात्मक प्रवाह के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की बिकवाली फिर शुरू हो गई है और कच्चे तेल की कीमत 102 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 95.15 पर खुला। बाद में यह कमजोर होकर 95.46 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 38 पैसे की गिरावट है। रुपया बुधवार को 34 पैसे टूटकर 95.08 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
कच्चे तेल की कीमत में तेजी का असर
कोटक सिक्योरिटीज के जिंस एवं मुद्रा शोध प्रमुख अनिंद्य बनर्जी ने कहा कि रुपया फिर से 95.45 के स्तर की ओर कमजोर हुआ है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि यह गिरावट डॉलर के कारण नहीं, बल्कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण है, क्योंकि डॉलर खुद कई महीनों के निचले स्तर पर है। बनर्जी ने कहा कि मुद्रा बाजार में इस समय कई दबावों के बीच संतुलन बना हुआ है। नकारात्मक कारकों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली, 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कच्चे तेल की कीमत और ऊंचा अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल शामिल है।
शेयर बाजार में गिरावट थमी
इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.01 प्रतिशत गिरकर 98.81 पर कारोबार कर रहा था। घरेलू शेयर बाजार में सेंसेक्स 138.36 अंक बढ़कर 74,902.59 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 46.30 अंक की बढ़त के साथ 23,477.80 अंक पर आ गया। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बुधवार को शुद्ध रूप से 582 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।
