युवा किराये पर रहना पसंद कर रहे हैं या घर खरीदना?

करियर में रफ्तार, शहरों में लगातार बदलते ठिकाने और होम लोन (EMI) के भारी-भरकम बोझ से आजादी की चाहत ने आज के युवाओं की सोच बदल दी है। यही वजह है कि आज की पीढ़ी प्रॉपर्टी खरीदने के पारंपरिक ढर्रे को छोड़ किराये पर रहने को ज्यादा तवज्जो दे रही है।

आज के समय में नौकरियां बहुत तेजी से बदलती हैं। बेहतर करियर ग्रोथ, अच्छी सैलरी या प्रमोशन के लिए युवाओं को अक्सर एक शहर से दूसरे शहर, या एक ही शहर में एक कोने से दूसरे कोने में शिफ्ट होना पड़ता है। अगर कोई युवा 20-25 साल के होम लोन पर भारी-भरकम ईएमआई (EMI) चुकाकर किसी एक इलाके में घर खरीद लेता है, तो वह एक तरह से उस जगह से बंध जाता है। ऐसे में किसी दूसरे शहर में मिलने वाली बेहतरीन जॉब अपॉर्चुनिटी को सिर्फ इसलिए छोड़ देना पड़ता है क्योंकि उनका अपना घर वहां है। वहीं इसके उलट, किराये के घर में रहने पर वे जब चाहें, जहां चाहें, अपने नए ऑफिस के पास आसानी से शिफ्ट हो सकते हैं, जिससे उनका रोज का ट्रैवल टाइम और स्ट्रेस दोनों बचता है। ऐसे में आइए आपको बताते हैं आज की युवा की पसंद क्या है और क्यों है?

किराए का घर या खुद का घर? (Pic Credit: Canva)

Rent Vs Buy

क्यों रेंट पर रहना ज्यादा पसंद कर रहे हैं युवा?

बड़े शहरों जैसे मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु या पुणे में प्रॉपर्टी की कीमतें आसमान छू रही हैं। एक अदद फ्लैट खरीदने के लिए भी लाखों रुपये का डाउन पेमेंट करना पड़ता है, जिसके लिए युवाओं की पूरी जमा-पूंजी खत्म हो जाती है। इसके बाद शुरू होता है हर महीने सैलरी का एक बड़ा हिस्सा ईएमआई के रूप में चुकाने का लंबा सिलसिला। इतनी बड़ी ईएमआई का दबाव युवाओं को रिस्क लेने से रोकता है। वे मनमुताबिक नौकरी बदलने या अपना खुद का कोई स्टार्टअप शुरू करने का जोखिम नहीं उठा पाते क्योंकि उनके सिर पर हर महीने बैंक की किस्त चुकाने की तलवार लटकी होती है। किराये पर रहने से वे इस मानसिक तनाव से मुक्त रहते हैं और अपनी बची हुई रकम को अन्य जगहों पर निवेश कर सकते हैं।

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