दिल्ली के स्थानीय बाजारों और व्यापार पर लगातार हो रहे धरने-प्रदर्शनों, रैलियों तथा ट्रैफिक की भीषण समस्याओं की मार पड़ी है। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAT) के अनुसार, पिछले एक महीने से अधिक समय से जारी इन रुकावटों के कारण दिल्ली के व्यापारियों को 4,000 करोड़ रुपये से भी अधिक का व्यापारिक नुकसान होने का अनुमान है। त्यौहारी सीजन के दौरान हुई इस गिरावट से न केवल बड़े और छोटे व्यापारी, बल्कि दैनिक मजदूरी करने वाले लोग भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
धरने-प्रदर्शनों, रैलियों और ट्रैफिक की परेशानी से कारोबार प्रभावित
छोटे कारोबारियों से लेकर दिहाड़ी मजदूरों तक पर पड़ा असर
बाजारों तक आम ग्राहकों की पहुंच कम होने से व्यापारिक गतिविधियां सुस्त पड़ गई हैं। इस मंदी की सीधी मार केवल बड़े दुकानदारों तक सीमित नहीं है, बल्कि रेहड़ी-पटरी वालों, दिहाड़ी मजदूरों, माल ढोने वाले पल्लेदारों और डिलीवरी कर्मियों की दैनिक कमाई भी काफी घट गई है। ग्राहकों की संख्या में आई इस भारी गिरावट से इन सभी परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
स्थानीय बाजारों से खरीदारी करने की अपील
व्यापारियों को इस नुकसान से उबारने के लिए चांदनी चौक से सांसद और कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने दिल्ली भाजपा के कार्यकर्ताओं, सांसदों, विधायकों, पार्षदों और पार्टी पदाधिकारियों से विशेष अपील की है। उन्होंने कहा है कि आगामी त्योहारों पर कपड़े, मिठाई, उपहार और घरेलू सामान की खरीदारी किसी अन्य माध्यम की बजाय दिल्ली के स्थानीय बाजारों और दुकानों से ही करें। खंडेलवाल ने जोर देकर कहा कि इस खरीदारी का मुख्य लाभ छोटे दुकानदारों, स्थानीय कारीगरों और पटरी दुकानदारों तक पहुंचना चाहिए, ताकि उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके।
राजनीतिक रैलियों और कार्यक्रमों पर चिंता
प्रवीन खंडेलवाल ने 1 नवंबर को प्रस्तावित राहुल गांधी की रैली का जिक्र करते हुए व्यापारियों की गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम या आंदोलन का विपरीत असर दिल्ली के व्यापार और आम जनता की आजीविका पर नहीं पड़ना चाहिए। लगातार होने वाले ऐसे आयोजनों से पूरा व्यापारिक नेटवर्क अस्त-व्यस्त हो जाता है।
विरोध का अधिकार जरूरी, लेकिन आम जनजीवन प्रभावित न हो
लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर बात करते हुए कैट के महामंत्री ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक और दल का लोकतांत्रिक अधिकार है। हालांकि, विरोध प्रदर्शन के दौरान इस बात का भी पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए कि इससे आम जनता को परेशानी न हो और लोगों का रोजगार ठप न पड़े।
स्थानीय खरीदारी बनी आर्थिक सहारा
कैट के अनुसार, इस कठिन समय में स्थानीय बाजारों से खरीदारी करना व्यापारियों और कारीगरों के लिए सबसे बड़ा आर्थिक सहारा बन सकता है। जब लोग अपने नजदीकी और स्थानीय बाजारों से सामान खरीदेंगे, तो व्यापारियों का कारोबार फिर से पटरी पर लौटेगा, मजदूरों को नियमित काम मिलेगा और हजारों परिवारों को आर्थिक राहत प्राप्त होगी।
