Credit Card Overlimit Facility : अचानक मेडिकल एमरजेंसी, ऑपरेशन या किसी अन्य बड़े खर्च के समय कई बार ऐसा हो सकता है कि आपके क्रेडिट कार्ड का खर्च तय सीमा (क्रेडिट लिमिट) से आगे निकल जाए। ऐसी स्थिति में, 'क्रेडिट कार्ड ओवरलिमिट फैसिलिटी' आपके उस ट्रांजैक्शन को पूरा करने में मदद करती है। हालांकि, लिमिट से ज्यादा खर्च करना आपकी जेब पर भारी भी पड़ सकता है। इसलिए, इस सुविधा का विकल्प चुनने से पहले कार्डधारकों को यह अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि यह कैसे काम करती है, इस पर कितना शुल्क लगता है और इसका आपके सिबिल या क्रेडिट स्कोर पर क्या असर पड़ता है।
जेब पर भारी न पड़ जाए क्रेडिट कार्ड की ओवरलिमिट! जानिए इसके फायदे, नुकसान और जरूरी शर्तें।
अक्टूबर 2026 तक के नियमों के मुताबिक, भारत के प्रमुख बैंक सामान्य तौर पर क्रेडिट लिमिट से ऊपर खर्च की गई राशि पर करीब 2.5 प्रतिशत तक का ओवरलिमिट चार्ज वसूलते हैं। यह चार्ज कम से कम 500 से 600 रुपये और उस पर लगने वाले जीएसटी के साथ लागू होता है। अलग-अलग बैंकों और कार्ड के प्रकार के हिसाब से यह फीस थोड़ी अलग हो सकती है। उदाहरण के लिए, एसबीआई कार्ड्स में यह न्यूनतम शुल्क 600 रुपये है, जबकि एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और आईसीआईसीआई बैंक में यह क्रमशः 550 रुपये, 500 रुपये और 500 रुपये तय किया गया है। इसलिए, किसी भी बैंक की इस सुविधा को लेने से पहले उनकी आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर लेटेस्ट नियम और शर्तें जरूर पढ़ लेनी चाहिए।
क्या होती है क्रेडिट कार्ड ओवरलिमिट फैसिलिटी?
सरल शब्दों में कहें तो ओवरलिमिट सुविधा क्रेडिट कार्ड धारक को उसकी तय सीमा से ज्यादा पैसे खर्च करने की अनुमति देती है। यह सुविधा बैंक की शर्तों और अप्रूवल के अधीन होती है। मान लीजिए आपकी क्रेडिट लिमिट 1 लाख रुपये है, तो इस फैसिलिटी के जरिए आप उससे अधिक राशि का भुगतान कर सकते हैं जो आपके बकाया को लिमिट से ऊपर ले जा सकता है। हालांकि, यह सुविधा ऑटोमैटिक नहीं होती। बैंक अपनी नीतियों के तहत आपके ट्रांजैक्शन को रिजेक्ट भी कर सकते हैं या सीमा पार करने पर जुर्माना लगा सकते हैं।
इसके लिए आपकी सहमति जरूरी
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार, सभी कार्ड जारी करने वाले बैंकों के लिए यह अनिवार्य है कि वे ओवरलिमिट सुविधा देने से पहले ग्राहक से साफ और स्पष्ट सहमति लें। अगर यूजर इसके लिए अपनी रजामंदी नहीं देता है, तो बैंक यह सुविधा नहीं दे सकते। बिना ग्राहक की मर्जी के बैंक अपनी तरफ से कोई चार्ज नहीं लगा सकते।
ओवरलिमिट चार्ज और फीस
यदि कोई व्यक्ति इस सेवा के लिए स्पष्ट रूप से हां कहता है, तो बैंक के नियम लागू हो जाते हैं। लिमिट क्रॉस होने पर बैंक तयशुदा फीस वसूलते हैं। इस बारे में पूरी स्पष्टता पाने के लिए यूजर्स को बैंक के कस्टमर केयर से बात करके यह पक्का कर लेना चाहिए कि चार्ज केवल अतिरिक्त राशि पर लग रहा है या किसी अन्य आधार पर।
अप्रूवल की कोई गारंटी नहीं
यह एक बहुत महत्वपूर्ण पहलू है। सिर्फ ओवरलिमिट का विकल्प चुन लेने से इस बात की गारंटी नहीं मिल जाती कि लिमिट से ऊपर किया गया हर ट्रांजैक्शन पास ही हो जाएगा। बैंक अपने जोखिम और आंतरिक नीतियों के आधार पर ट्रांजैक्शन को अब भी अस्वीकार कर सकते हैं।
ब्याज बढ़ा सकता है आपका कर्ज
यदि आप इस सुविधा का इस्तेमाल करते हैं और बिल का पूरा भुगतान समय पर नहीं करते हैं, तो आपका कुल कर्ज काफी बढ़ सकता है। इसे 'अतिरिक्त आय' या मुफ्त का पैसा समझने की भूल न करें। किसी भी तरह के आश्चर्य से बचने के लिए रीपेमेंट के नियमों और ग्रेस पीरियड की पूरी जानकारी रखें।
बढ़ सकता है आपका क्रेडिट यूटिलाइजेशन
जब आप अपनी लिमिट से ज्यादा खर्च करते हैं, तो आपका क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो (CUR) बढ़ जाता है, जिसका आपके क्रेडिट स्कोर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। आदर्श रूप से, अपने कुल क्रेडिट का केवल 25 से 30 प्रतिशत हिस्सा ही इस्तेमाल करना चाहिए। लगातार ज्यादा खर्च आपकी वित्तीय निर्भरता को दिखाता है।
भुगतान की जिम्मेदारी आपकी खुद की है
सीमा से अधिक खर्च की गई कुल राशि को तय समयसीमा के भीतर चुकाना आपकी अपनी जिम्मेदारी है। रीपेमेंट में एक दिन की भी देरी भारी पेनल्टी का कारण बन सकती है और आपके क्रेडिट इतिहास को खराब कर सकती है।
आपातकाल के लिए है यह विकल्प, बजट का विकल्प नहीं
संक्षेप में कहें तो क्रेडिट कार्ड की ओवरलिमिट फैसिलिटी आपात स्थिति में आपको वित्तीय लचीलापन जरूर देती है, लेकिन यह आपकी बचत या बेहतर बजट प्लानिंग का विकल्प नहीं हो सकती। इस सुविधा का इस्तेमाल बहुत संभलकर और समझदारी के साथ करना चाहिए ताकि अनावश्यक कर्ज के बोझ से बचा जा सके।
